ZEE NEWS ने ठाना है, हथिनी को इंसाफ दिलाना है

नई दिल्ली: केरल के पलक्कड़ में हथिनी के साथ बर्बरता की घटना के बाद देश भर में गुस्सा है. पटाखों भरा अनानास खिलाने से हथिनी की मौत हो गई. जी न्यूज़ पर हथिनी के इंसाफ के लिए कवरेज लगातार जारी है.केरल में हथिनी की मौत पर पर्यावरण मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है. केरल सरकार से रिपोर्ट मांगी गई है. वहीं बीजेपी सांसद मेनका गांधी ने केरल सरकार पर निशाना साधा है. आज एक हाथी मारा गया कल एक और मारा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट को इस पर निर्णय देना चाहिए.

बर्बरता ने इंसानियत को कठघरे में खड़ा कर दिया
केरल के पल्लकड़ में एक हथिनी के साथ हुई बर्बरता ने इंसानियत को कठघरे में खड़ा कर दिया है. इंसान किस कदर जंगली हो चुका है. ये खबर बता रही है. केरल में कुछ इंसानों ने एक भूखी और गर्भवती हथिनी को जलते हुए पटाखों से भरा अनानास खिला दिया और उस हथिनी की तड़प-तड़प कर मृत्यु हो गई. हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि एक गर्भवती महिला या जीव को चोट पहुंचाना सबसे बड़ा पाप है. क्योंकि ऐसा करके आप न सिर्फ एक मां को चोट पहुंचाते हैं, बल्कि उसके अजन्मे बच्चे को भी क्षति पहुंचाते हैं. केरल में कुछ लोगों ने ये पाप किया और साबित कर दिया कि इंसान की योनि में पैदा होकर भी वे जानवरों जैसा बर्ताव कर सकते हैं.

इंसान होने पर शर्म आ जाए
खाने की तलाश में जब एक हथिनी मानव बस्ती में पहुंची तो इंसान ही जानवर बन गए. केरल के पलक्ड़ में जो हुआ उसे देखकर ये मुमकिन है कि आपको इंसान होने पर शर्म आ जाए. भूखी हथिनी को कुछ स्थानीय लोगों ने ऐसे फल खिलाए जो इस जानवर और उसके बच्चे की भूख को शांत तो नहीं कर सके. पर इंसानों के इस भद्दे खेल ने बेजुबानों की जिंदगी छीन ली. 

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आखिरी वक्त में शायद ऐसी ही कोई बातचीत हथिनी और उसके पेट में पल रहे बच्चे के बीच हुई होगी. जिसने अभी दुनिया देखी भी नहीं थी और जो इंसानों के हाथों मारा गया.

बेजुबानों ने इंसानों पर भरोसा किया लेकिन धरती के सबसे समझदार सामाजिक जानवर इंसान ने जैसे मानव सभ्यता को ही शर्मसार कर दिया.

यहां जानवर कौन है?
ये दर्दनाक घटना केरल के मल्लपुरम में 27 मई को हुई. इंसानों के बीच पहुंची गर्भवती हथिनी को खाने के लिए फल तो मिले लेकिन उनमें पटाखे भरे थे. जो शरीर में जाते ही फटने लगे. इसके बावजूद उसने गांव में किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और वो वेल्लियार नदी में जाकर खड़ी हो गई. हथिनी पानी में मुंह डालकर खड़ी है. शायद ऐसा करने से उसे आराम मिल रहा होगा. वो भूखी थी लेकिन कुछ खा नहीं पा रही थी.

जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम रेस्क्यू के लिए पहुंची. हथिनी को पानी से बाहर निकाला गया.

रेस्क्यू के लिए जिन हाथियों का इस्तेमाल किया गया वो भी शोक में खड़े थे. एक हाथी अपनी सूंड़ से इस हथिनी को छू रहा था, शायद उसे जगाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था. इंसानियत की परिभाषा के आगे ये हथिनी हार मान चुकी थी.

महात्मा गांधी ने कहा था कि अगर किसी देश की महानता का अंदाजा लगाना है तो ये देखिए कि वहां जानवरों के साथ कैसा व्यवहार होता है. ऐसे में ये घटना हम सबके लिए एक सवाल है. सवाल ये है कि यहां जानवर कौन है?

 हथिनी की हत्या के लिए कौन जिम्मेदार

यहां आपके मन में ये सवाल भी उठ रहा होगा कि इस हथिनी की हत्या के लिए कौन जिम्मेदार है. हमने ये बात भी पता लगाने की कोशिश की है.

केरल पुलिस अभी इस मामले के आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है. यानी केरल की पुलिस भी इसके लिए जिम्मेदार है. इसके अलावा जिस इलाके में ये घटना हुई वहां के वन्य अधिकारी भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. क्योंकि वो समय रहते इस हथिनी के बारे में पता नहीं लगा सके. केरल में हथिनी के साथ हुई बर्बरता पर देश भर में गुस्सा है.

मेनका गांधी ने केरल सरकार को कठघरे में खड़ा किया है मेनका गांधी ने कहा कि केरल की सरकार से कुछ भी मांगना बेवकूफी है. सुप्रीम कोर्ट को इस पर फैसला देना चाहिए. कई सालों से हाथी का केस पेंडिंग है.

[source_ZEE NEWS]
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