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SC ने नियमों में किया बदलाव, अब एक जज की बेंच भी बैठेगी

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने अपने नियमों में बदलाव किया है. बुधवार से एक जज की बेंच भी बैठा करेगी जो ज़मानत और किसी मामले की सुनवाई एक राज्य से दूसरे राज्य की निचली अदालत में ट्रांसफ़र करने के मामलों की सुनवाई करेगी. अभी तक सुप्रीम कोर्ट में दो जजों से कम जज की बेंच का प्रावधान नहीं था.  यानी सुप्रीम कोर्ट के एकल न्यायाधीश की पीठ 13 मई से अग्रिम जमानत और जमानत के ऐसे मामलों की सुनवाई करेगी जिनमें दोषी पाये जाने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है. यह पीठ मुकदमों के स्थानांतरण की याचिकाओं की भी सुनवाई करेगी. 

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला अवसर है जब मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी एकल न्यायाधीश को सौंपी जा रही है. अभी तक शीर्ष  अदालत में किसी भी मामले की सुनवाई कम से कम दो या तीन न्यायाधीशों की पीठ करती आ रही थी.  शीर्ष अदालत में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के इरादे से सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 में पिछले साल सितंबर में कुछ संशोधन किये गये थे जिसके तहत एकल न्यायाधीश सात साल तक की सजा वाले मामलों में अग्रिम जमानत और जमानत की अपीलों पर सुनवाई करेंगे. 

शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर सोमवार को अपलोड की गई नोटिस में यह जानकारी दी गई. नोटिस के अनुसार अन्य संशोधनों के अलावा सक्षम प्राधिकार ने प्रावधान किया है कि चुनिंदा श्रेणी के मामलों को चीफ जस्टिस द्वारा नामित एकल न्यायाधीश अंतिम रूप से सुनवाई करके उनका निस्तारण करेंगे. 

नोटिस में कहा गया है कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों के मामले में दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 437, 438 या धारा 439 के तहत पारित आदेश के खिलाफ जमानत आवेदन या अग्रिम जमानत आवेदन खारिज करने के मामले में दायर विशेष अनुमति याचिकाओं की सुनवाई एकल न्यायाधीश करेंगे. 

इसी तरह, एकल न्यायाधीश दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 406 के तहत मुकदमों के स्थानांतरण और दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 25 के तहत तात्कालिक स्वरूप के मुकदमों के स्थानांतरण के आवेदनों की भी सुनवाई करेंगे. नोटिस में कहा गया है कि इस तरह के मामले 13 मई से एकल न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध होंगे. इस संबंध में पिछले साल 17 सितंबर को राजपत्र में एक अधिसूचना जारी की गई थी जिसके माध्यम से शीर्ष अदालत ने अपने 2013 के नियमों में संशोधन किये थे. 

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के नियम, 2013 और पुराने नियमों के अनुसार चीफ जस्टिस को ग्रीष्मावकाश या शरद अवकाश के दौरान तात्कालिक स्वरूप के सारे मामलों की सुनवाई के लिए एक या अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार था. 

(इनपुट: एजेंसी भाषा के साथ)


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