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Lockdown को लेकर शिवसेना ने सरकार पर कसा तंज, कोरोना काल को बताया ‘नया कलियुग’

मुंबई: कोरोना (Corona) काल में लोगों को समझ नहीं आ रहा कि क्या करें. केंद्र सरकार ने बीस लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा तो कर दी है लेकिन अभी उसका असर जमीनी स्तर पर दिखने में कुछ समय लग सकता है. ऐसे में शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana) के जरिए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं. 

मंगलवार को सामना ने अपने संपादकीय (Saamana Editorial) में प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) का मुद्दा उठाया है. सामना ने लिखा, ‘प्रवासी मजदूर का पैदल चलना और उसकी परेशानी कायम है. महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों से जब ये मजदूर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुए तब उन्हें केंद्र सरकार द्वारा नहीं रोका गया. उनकी व्यवस्था नहीं की गई. जब ये लाखों मजदूर उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंचे तो वे वहां फंस गए. उन्हें उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं देने के आदेश हैं.

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इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में हैं. आज पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक हिंदुओं का स्वागत करनेवाली ये सरकारें पड़ोसी राज्यों से आए अपने ही भाइयों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. इस अमानवीय अस्पृश्यता को क्या कहें?’

केंद्र सरकार के बंद और वित्त मंत्री के पेश किए पैकेज पर निशाना साधते हुए सामना में लिखा, ‘शिक्षण संस्थान कब खुलेंगे? कामगार काम पर कब लौटेंगे? (मतलब नौकरी बची तो!) आसमान में हवाई जहाज कब उड़ान भरेंगे? रेलवे पटरियों पर लोकल्स कब दौड़ेंगी? बस सेवा कब शुरू होगी? मुंबई के सिनेमाघरों में रौनक कब लौटेगी? या हम ‘मूक चित्रपट’ या जंगल युग में वापस जाएंगे? फिलहाल यह एक रहस्य ही बना हुआ है. अगर हम चरणबद्ध तरीके से ये सब शुरू करने का विचार करें तो मुंबई में 20 हजार कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा खतरे की घंटी बजा रहा है.’

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‘केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मलाताई रोज किसी-न-किसी को पैकेज देने की घोषणा करने के लिए दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही हैं. हालांकि जिस दिन ये पैकेज लोगों तक पहुंचेगा, वही असली साबित होगा. प्रवासी मजदूरों के पैर बुरी तरह से घायल हैं. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने दिल्ली की सड़कों पर मजदूरों के साथ कुछ देर बैठकर बातचीत की. इसके कारण निर्मलाताई का दुखी होना आश्चर्यजनक ही कहा जाएगा. अगर कोई श्रमिकों की पीड़ा को कम कर रहा है, तो सरकार को खुश होना चाहिए, लेकिन यहां इसके विपरीत हो रहा है.’

सामना ने आगे लिखा, ‘मंत्री लॉकडाउन सहलाते बैठे हैं. मजदूर लॉकडाउन तोड़कर बाल-बच्चों के साथ सड़कें नाप रहे हैं. जो लोग इस बात से दुखी हैं कि गांधी नाम को जीते हुए विपक्ष के एक नेता ने सड़कों पर खड़े होकर मजदूरों को गले लगाया, उन लोगों को अब मानवता और परंपरा की डींगें नहीं हांकनी चाहिए. वे अपने ही लोगों को राज्य में लेने का विरोध करते हैं और उन लोगों से नफरत करते हैं जो श्रमिकों की पीड़ा के बारे में बात करते हैं. यह सच है कि कोरोना एक नया कलियुग लेकर आया है!’

 

[source_ZEE NEWS]