Exclusive: सुनिए कैसे पाक जासूस सेना के जवान को फंसा रहा था जाल में

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का एक लंबा सिलसिला है. पाकिस्तान हर दिन हिंदुस्तान से पिटता है. रविवार को  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आबिद और ताहिर नाम के दो जासूसों को पकड़ा था. ये दोनों पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा असिस्टेंट का काम करते थे, लेकिन दोनों का असली काम ISI के लिए जासूसी करना था और अब इन दोनों को बेनकाब कर वापस पाकिस्तान भेज दिया गया है. 

आइए अब आपको पाकिस्तानी जासूसों की करतूत भी बता देते हैं. पाकिस्तान की पोल खोलने वाला वीडियो ZEE NEWS के पास है. आप भी सुनिए कैसे पाकिस्तान का जासूस सेना के जवान को झूठी दोस्ती में फंसाने के लिए जाल बुन रहा था. 

आबिद (जासूस): हैलो, ये बताइये आप 1705 आरपीएम में तो नहीं रह रहे कहीं. 
जवान: नहीं सर ये मेरी पहली यूनिट है. 

आबिद: मेरा ना एक फ्रेंड है, मेरा मोबाइल डिस्टर्ब हुआ था तो मैंने अपना मोबाइल चेंज किया. उसका नाम भी रॉय था. मेरा एक फ्रेंड था, जिसका नाम रॉय था. तो मैंने कहा चलो मेरे पास भी एक रॉय है. उसका नंबर देना तो मैं चेक करूंगा कि ये वही रॉय तो नहीं जो मेरा फ्रेंड था. 326 में हो ना आप?
जवान:  हां जी सर, यहीं दिल्ली में हैं, आप कहां पर हैं सर?

आबिद: मैं भी 106 में हूं, दिल्ली में ही हूं. 
जवान: अच्छा-अच्छा

आबिद: लेकिन फैमिली नोएडा में रखी हुई है. वहां अपना ही घर है, तो वहीं चला जाता हूं. 
जवान: अच्छा-अच्छा

आबिद: मेरा एक फ्रेंड था रॉय. तो मैंने कहा वो भी वेस्ट बंगाल में तैनात था. मुझे लगा वो आप ही हो. मेरी यादव से बात हुई ना, तो उसने बोला कि मेरे पास भी पश्चिम बंगाल का रॉय है. तो मैंने कहा कि शायद मेरा वही फ्रेंड हो ना हो. तो मैंने कहा चलो संपर्क करके आपस में बात कर लेता हूं ताकि आपका पता चल जाए कि मेरा फ्रेंड तो नहीं है.  
जवान: ठीक है, ठीक है. 

आबिद: आपने व्हॉट्सऐप वाला नंबर नहीं रखा रॉय भाई. 
जवान: नहीं सर! यहां व्हॉट्सऐप तो नहीं चलाने देते सर. 

आबिद: नहीं, हमें तो इजाजत है. किसी ने बंद तो नहीं किया. आपकी अभी नौकरी की शुरुआत हुई है, इसलिए. 
जवान: सर, लाइन में चेक करते हैं. 

आबिद: लाइन में तो यही दिक्कत होती है. चलिए कोई बात नहीं. और छुपाकर रखना पड़ता है, ना तो ऐसा ही हो जाता है. चलिए कभी समय निकालकर मुलाकात करते हैं आपसे. 
जवान: ठीक है, करते हैं. 

सूत्रों के मुताबिक आबिद, ताहिर ये वो दो नाम हैं जो पाकिस्तान की खुफिया एंजेंसी ISI की साजिश को भारत में अंजाम देते थे लेकिन इन्हें इस बात का जरा भी अहसास नहीं था कि इनके हर गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है. जैसे ही ये दोनों दिल्ली के करोलबाग इलाके पहुंचे, स्पेशल सेल और मिलिट्री इंटेलीजेंस यूनिट अलर्ट हो गई. कुछ ही मिनट में आबिद और ताहिर सेना के दस्तावेज पाने के कामयाब हो गए. 5 पेज के कागजात में आर्मी के मुवमेंट और डिप्लॉयमेंट से जुड़ी अहम जानकारियां थी. तभी स्पेशल सेल और  MIU की टीम ने आबिद ताहिर और उनके ड्राइवर को पकड़ा.

वीडियो देखें:

 

सूत्रों के मुताबिक आबिद और ताहिर को ISI ने भारतीय सेना और रेल मंत्रालय के जुड़ी अहम जानकारी जुटाने का जिम्मा सौंपा था. दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग में दोनों वीजा असिस्टेंट के पद पर तैनात किये गए थे. स्पेसल सेल अब इनके कॉल डिटेल खंगाल रही. भारत में तैनाती के बाद इन्होंने किस-किस को कॉल किया. भारत में कौन है जो इन्हें जानकारियां दे रहा है. सेना के अहम दस्तावेज किसने इन्हें दिए. 

सूत्रों के मुताबिक आबिद और ताहिर पुलिस को चकमा देने में भी माहिर है. उसने पुलिस को बरगलाने की तैयारी भी कर रखी थी. तभी तो करोलबाग में पकड़े जाने के बाद आबिद ने खुद को गीता कॉलोनी का निवासी बताया सबूत के तौर पर आधार कार्ड दिखाए जिसमें नाम नासिर गौतम लिखा था लेकिन जांच में आबिद का आधार फर्जी था और पूछताछ वो खुद पाकिस्तानी जासूस निकला. दोनों को पाकिस्तान वापस भेज दिया गया है.

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