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DNA ANALYSIS: 22 साल पुराने ‘अटल’ इरादे का ‘परमाणु विश्लेषण’

नई दिल्ली: एक मशहूर कहावत के मुताबिक इतिहास वो बनाते हैं, जो दुनिया की परवाह नहीं करते. 22 वर्ष पहले आज ही के दिन, भारत ने भी एक ऐसा ही इतिहास रचा था जिसने पूरी दुनिया को 440 वोल्ट का झटका दे दिया था. 

11 मई 1998 की तारीख, इतिहास के पन्नों में पोखरण परमाणु परीक्षण के नाम से दर्ज है. जब दुनिया की महाशक्तियों की इच्छा के खिलाफ, भारत दुनिया की छठी परमाणु शक्ति बन गया था. तबतक तत्कालीन सोवियत संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ने ही परमाणु परीक्षण किए थे.

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण में, 11 मई से 13 मई 1998 के दौरान, कुल पांच परमाणु परीक्षण किए गए थे. ये परीक्षण एक गोपनीय अभियान के तहत किए गए थे और इस अभियान का नाम था ऑपरेशन शक्ति. ऑपरेशन शक्ति को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत ने खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया था. लेकिन उस समय ये बात खुद को परमाणु शक्ति का ठेकेदार समझने वाले देशों को रास नहीं आई थी. 

इस परमाणु परीक्षण से भारत को जो पांच चीजें हासिल हुईं और जिन पांच बातों ने भारत को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया वो आपको समझनी चाहिए. 

पहली ये कि भारत, दुनिया का छठा न्यूक्लियर संपन्न देश बन गया था, जिससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हुई. दूसरी बात ये कि भारत के परमाणु परीक्षण के बाद पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण किए थे, जिससे उसका झूठ दुनिया के सामने आ गया था कि उसके पास कोई परमाणु हथियार नहीं हैं. 

ज्यादातर देशों ने भारत के खिलाफ जो प्रतिबंध लगाए थे, वो सभी पांच वर्षों के भीतर हटा लिए गए थे. जिस अमेरिका ने भारत पर सबसे सख्त प्रतिबंध लगाए थे, उसने दो वर्षों में ही सारे प्रतिबंध खत्म कर दिए थे. वर्ष 2000 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत के पहले दौरे पर आए थे. दो दशकों में ऐसा करने वाले वो पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे.  

जिसके करीब आठ वर्षों बाद अक्टूबर 2008 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत के साथ असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. भारत और अमेरिका के बीच ये परमाणु दोस्ती अभी भी कायम है. 

पोखरण परमाणु परीक्षण का एक मकसद परमाणु ऊर्जा का असैन्य इस्तेमाल करके ऊर्जा संकट को खत्म करना भी था. भारत इस समय 6780 मेगावाट एटोमिक एनर्जी पैदा करने की क्षमता हासिल कर चुका है और जल्द ही इस क्षमता को 40 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य तय किया गया है. 

लेकिन इस सबसे ऊपर है देश की सुरक्षा का बोध. आज अगर चीन, भारत पर कोई बड़ा हमला करने से कतराता है तो इसका श्रेय तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के उस फैसले को भी जाता है जिसने भारत को दुनिया में एक परमाणु शक्ति के तौर पर स्थापित कर दिया था. 


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