DNA ANALYSIS: 2 महीने बाद शुरू हुईं हवाई सेवाओं की ग्राउंड रिपोर्ट

नई दिल्ली: कोरोना काल में हवाई सफर शुरू हो गया है. लॉकडाउन के दो महीनों के बाद आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल को छोड़कर देश भर में घरेलू उड़ानें शुरू हो गई हैं. लेकिन अब हवाई यात्रा के तमाम नियम कायदे बदल चुके हैं और अब इस मामले में कुछ भी पहले जैसा नहीं रहा. ये भारत के हवाई यात्रा के इतिहास में आया एक बहुत बड़ा मोड़ है. इसलिए हमने भारत की हवाई यात्रा के 109 साल के इतिहास का विश्लेषण करके इस बदलाव को समझने की कोशिश की है. लेकिन सबसे पहले ये समझ लीजिए कि हवाई यात्रा को लेकर नए नियम क्या कहते हैं और किन स्थितियों में आप हवाई सफर कर सकते हैं. 

अगर आपको कोरोना वायरस के कोई लक्षण हैं तो यात्रा करना तो दूर, आपको एयरपोर्ट में एंट्री भी नहीं मिलेगी. हो सके तो आप अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करके रखिए, क्योंकि एयरपोर्ट पर एंट्री के लिए ये जरूरी है. अगर ये ऐप आपके मोबाइल फोन में किसी कारणवश नहीं है तो फिर आपको वो ईमेल दिखाना होगा, जो आपकी एयरलाइंस की तरफ से आया होगा. ये ईमेल तब आता है जब आप अपने हेल्थ स्टेटस का डिक्लेरेशन देते हो, जिसमें स्वस्थ्य होने का दावा आपने किया है. 

यात्रा के निर्धारित समय से दो घंटे पहले ही आप एयरपोर्ट पहुंच जाइए. घर से आप कम से कम सामान लेकर निकलिए, क्योंकि अब एक ही चैक इन बैग और एक ही केबिन बैग की इजाजत है. आपको वेब चेक इन ही करना होगा, क्योंकि एयरपोर्ट्स पर चेक इन काउंटर नहीं खोले गए हैं.

वेब चेक इन करा चुके यात्रियों को ही टर्मिनल में आने दिया जाएगा. एयरपोर्ट में एंट्री के वक्त आपका टिकट, बोर्डिंग पास और पहचान पत्र चेक होगा. इसके बाद आपका टेम्परेचर चेक किया गया जाएगा और आरोग्य सेतु ऐप पर स्टेटस देखा जाएगा कि आप सुरक्षित हैं या नहीं. 

इसके बाद आपको अपने सामान की भी ऑनलाइन चेक इन ही करनी होगी और बैगेज टैग भी खुद ही निकालना होगा. ये सब आप फ्लाइट के निर्धारित समय से 75 मिनट पहले तक ही कर सकते हैं. इसी के साथ आपको ऐसा फॉर्म भी भरना होगा जिसमें लिखा गया है कि क्वारंटीन का खर्च यात्री खुद उठाएंगे और उनकी वजह से अगर एयरलाइंस पर कोई जुर्माना लगता है तो जुर्माना यात्रियों से ही वसूला जाएगा. 

हवाई यात्रा के दौरान फेस मास्क लगाना अनिवार्य है और इसमें आपको किसी तरह का कोई डिस्काउंट नहीं मिलेगा. एयरपोर्ट्स पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करना होगा. एयरपोर्ट पर लोग एक दूसरे के आस पास ना बैठ सके इसके लिए बीच की सीटों पर मार्किंग कर दी गई है, किसी को भी इन सीटों पर बैठने की इजाजत नहीं होगी. एयरपोर्ट पर मौजूद सभी कर्मचारियों को के लिए भी फेस मास्क, फेस शील्ड और पीपीई किट अनिवार्य हैं. सुरक्षा जांच के लिए इस तरह का इंतजाम किया गया है कि फिजिकल कॉन्टैक्ट कम से कम हो. 

फ्लाइट के अंदर एक नई बात ये है कि आपको खाने पीने का कोई सामान नहीं मिलेगा. यात्रियों को सिर्फ एक पानी की बोतल ही मिलेगी. एयरलाइंस की तरफ से फ्लाइट में बोर्ड करने से पहले यात्रियों को मास्क, ग्लब्स और फेस शील्ड दिया जाएगा. इसके अलावा पायलट और एयर होस्टेस को भी PPE और फेस शील्ड पहननी होगी. फ्लाइट के अंदर यात्रियों को मैगजीन और न्यूज पेपर भी नहीं मिलेंगे. यात्रियों को फ्लाइट के वॉशरूम का इस्तेमाल कम से कम करने की भी सलाह दी गई है. इसके अलावा अब बार-बार एयर होस्टेस को भी नहीं बुलाया जा सकेगा. 

लैंडिंग के बाद ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्लेन से उतरने के लिए भीड़ ना लगे. एक एक करके सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यात्रियों को उतारा जाएगा. सिर्फ यही नहीं आपको उस राज्य के क्वारंटीन के नियम का भी पालन करना होगा, जिस राज्य में फ्लाइट जा रही है. लेकिन हर राज्य ने हवाई यात्रियों के क्वारंटीन के अलग अलग नियम बनाए हैं.

हवाई यात्रियों के लिए क्वारंटीन के नियमों को लेकर बहुत विवाद भी हुआ है, क्योंकि केंद्र सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट नीति नहीं बताई गई थी, जिससे ये असमंजस था कि हवाई यात्रियों के लिए क्वारंटीन होना जरूरी है या नहीं. बाद में राज्यों ने अपने अपने हिसाब से नियम तय किए हैं. जैसे आपकी फ्लाइट मुंबई की है तो फिर मुंबई में आपको 14 दिन के होम क्वारंटीन में रहना होगा. 

देखें DNA- 

महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब जैसे कई राज्यों में 14 दिन का होम क्वारंटीन अनिवार्य किया गया है. हालांकि उत्तर प्रदेश में ये नियम बनाया गया है कि अगर बिजनेस के सिलसिले में कोई यात्री जाता है तो उसे क्वारंटीन से छूट मिलेगी. गुजरात में भी यात्रियों पर ऐसा कोई दबाव नहीं है, सरकार ने सिर्फ अपील की है. लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में 14 दिन का इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन जरूरी किया गया है. हवाई यात्रियों के लिए कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में 7 दिन का इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन जरूरी है और 7 दिन खुद को होम क्वारंटीन करना होगा. 

कोरोना वायरस से पहले भारत में हर दिन औसतन साढ़े 7 लाख लोग हवाई यात्रा करते थे लेकिन अब स्थिति ये है कि दो महीने बाद शुरू हुई हवाई यात्रा के पहले दिन सिर्फ 532 फ्लाइट्स ने उड़ान भरी जिसमें करीब 40 हजार लोगों ने यात्रा की. इसके अलावा करीब 160 फ्लाइट्स कैंसिल भी हुई हैं, जिसकी वजह से यात्री परेशान भी रहे. पहले दिन देश भर के एयरपोर्ट्स पर क्या हाल था, लोगों किस तरह से खुद को कोरोना काल की हवाई यात्रा के लिए तैयार किया. आपको इस पर हमारी ग्राउंड रिपोर्ट जरूर देखनी चाहिए. 

62 दिन के बाद जब देश में घरेलू हवाई उड़ानें शुरु हुईं तो देशभर के हवाई अड्डों पर रौनक लौटी लेकिन कुछ भी, पहले जैसा नहीं है, और जो है, वही अब नया सामान्य है.

यात्रियों के चेहरे के भाव पढ़ना तो मुश्किल था क्योंकि सभी यात्रियों को मास्क पहनना जरूरी था. कई यात्री तो पीपीई किट्स भी पहने हुए थे. लेकिन उनके हाव-भाव और बातें बता रही थीं कि हवाई यात्रा शुरु होना उनके लिए क्या मायने रखता है. हर किसी की अपनी अलग कहानी थी. 

दिल्ली से फ्लाइट लेने वालों में पांच साल का विहान शर्मा भी शामिल था, जिसने आज अकेले बेंगलुरु तक का हवाई सफर किया. वो दिल्ली में अपने दादा-दादी के घर आया था और लॉकडाउन हो गया. आज उड़ानें शुरु हुईं तो तो वो अकेले ही दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचा है, जिसे एयरपोर्ट पर मां ने रिसीव किया. 

सरकार ने कुछ नियम और शर्तों के साथ उड़ानें शुरू की हैं. जिनका पालन सभी यात्री पूरी ईमानदारी के साथ कर रहे थे. फिर चाहे वो मास्क पहनना हो, आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना हो, वक्त से एयरपोर्ट पर पहुंचना हो और एयरपोर्ट पर थर्मल स्कैनिंग करवाना हो. 

हवाई अड्डों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा था. लेकिन हवाई यात्रा करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी शर्त थी, दूसरे राज्यों में जाकर क्वारंटीन होना. जिसका हर यात्री से सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाया जा रहा था. घर जाने के लिए उत्साहित लोग, सारी फॉर्मेलिटी खुशी खुशी पूरी कर रहे थे. 

फ्लाइट में बोर्ड करने से पहले एयरलाइंस कंपनियां सभी यात्रियों को मास्क मुहैया करवा रही हैं. एयरहोस्टेस, पीपीई किट्स और फेस शील्ड लगाए हुए हैं. सभी यात्रियों के हाथों को सैनिटाइज करवाया जा रहा है. हवाई यात्रा के सामान्य नियमों के साथ साथ बदले हुए सोशल डिस्टेंसिंग जैसे जरूरी नियमों की भी अनाउंसमेंट की जा रही है. 

हालांकि कुछ यात्रियों का कहना है कि एयरपोर्ट पर जिस तरह की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है, फ्लाइट के अंदर वैसा पालन नहीं हो रहा है. 

25 मार्च को बंद की गईं घरेलू हवाई सेवाओं को सोमवार को एक-तिहाई क्षमता के साथ शुरू किया गया है. सोमवार को इसका पहला दिन था, कई फ्लाइट्स लेट भी हुईं और कुछ फ्लाइट्स को रद्द भी करना पड़ा. जिससे लोगों को परेशानी भी हुई. 

2 महीने के बाद सोमवार सुबह से फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो गया है. मुंबई में 25 फ्लाइट्स का डिपार्चर होगा तो 25 फ्लाइटस का ही अराइवल भी होगा. फिलहाल हालात ये हैं कि यहां आने के बाद लोगों को बताया जा रहा है कि उनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है. इससे पहले ना उन्हें कोई मैसेज आता है, ना कॉल और ना ही कोई ईमेल. ऊपर से एयरलाइन की तरफ़ से कोई भी शख्स एयरपोर्ट पर लोगों को सही जानकारी देने के लिए मौजूद नहीं है. इनमें से कुछ तो सीनियर सिटीजन भी हैं. ऐसी ही एक महिला हमें मिलीं, ये मुंबई में अकेली रहती हैं, अब इन्हें दिल्ली अपने बच्चों के पास जाना है. शहर में कोई टैक्सी या ऑटो चल नहीं रहे हैं, ऐसे में पड़ोसियों की मदद से एयरपोर्ट आईं तो इन्हें बताया गया कि इनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है. ऐसे ही एक ओर परिवार है जिसमें एक छोटी बच्ची है जो अपनी मम्मी के साथ दिल्ली में अपने पापा के पास जाना चाहती है. इन्हें भी बताया गया है कि इनकी एयर इंडिया की फ्लाइट कैंसिल हो गई है.अब इस बच्ची का रो रो कर बुरा हाल हो रहा है. 

पहले लॉकडाउन के वक्त लोगों ने सोचा था कि ये थोड़े दिनों की बात है,  लेकिन अब एक बात तो साफ है कि कोरोना अब जल्दी हमारी जिंदगी से जाने नहीं वाला.  लेकिन इससे जिंदगी नहीं रुक सकती. लोग अब इस सच्चाई को मान चुके हैं जिसकी तस्दीक देश के हवाई अड्डों की तस्वीरें कर रही हैं. 

[source_ZEE NEWS]
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