DNA ANALYSIS: वायुसेना के लड़ाकू विमान ने किया शक्ति प्रदर्शन, जानें खासियत

नई दिल्ली: लड़ाकू विमान के बारे में अक्सर एक बात कही जाती है, कि दुनिया में जिस देश के पास सबसे ताकतवर वायुसेना होती है, उसे ही सबसे शक्तिशाली माना जाता है और किसी भी वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत होते हैं उसके लड़ाकू विमान. मंगलवार को भारतीय वायुसेना की इस ताकत में और ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है. 

लद्दाख में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारतीय वायुसेना में आज, Light Combat Aircraft, यानी LCA तेजस का नया Squadron शामिल हो गया है. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल, RKS भदौरिया ने तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस पर तेजस को 18वीं Squadron को सौंपा, जो तेजस को उड़ाने वाली वायुसेना की दूसरी Squadron होगी. इससे पहले 45वीं Squadron इसे उड़ा चुकी है. 

इस खास मौके पर वायुसेना प्रमुख ने सिंगल सीटर तेजस में उड़ान भी भरी. ये बात इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर कोई बड़ा अधिकारी या राजनेता जब तेजस में उड़ान भरते हैं तो दो सीट वाले तेजस का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें वो पीछे वाली सीट पर बैठते हैं, लेकिन वायुसेना प्रमुख ने सिंगल सीट वाले वाले तेजस को खुद उड़ाया. 

इसकी वजह ये है कि उनका स्वदेशी लड़ाकू विमान, तेजस से पुराना रिश्ता है. RKS भदौरिया तेजस विमान को डेवलप करने के दौरान इसके टेस्ट पायलट रह चुके हैं और वो इससे अच्छी तरह वाकिफ भी हैं. इतना ही नहीं, वो क्वालीफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर भी हैं. 

वैसे इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी सितंबर 2019 में तेजस में उड़ान भर चुके हैं. वर्ष 2018 में अमेरिका और फ्रांस के वायु सेनाध्यक्ष भी तेजस को उड़ा चुके हैं. यानी हमारे स्वदेशी एयरक्राफ्ट में दुनिया के बड़े-बड़े देशों की दिलचस्पी है. 

तेजस विमान को भारत में ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने बनाया है. दरअसल भारत में इस लड़ाकू विमान को बनाने की शुरुआत आज से करीब 37 वर्ष पहले हुई थी जब अगस्त 1983 में Light Combat Aircraft प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी. वर्ष 2003 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस लड़ाकू विमान को तेजस का नाम दिया था. ये संस्कृत का शब्द है, जिसका मतलब होता है सबसे ताकतवर ऊर्जा. 

वायुसेना की जिस 18वीं Squadron में तेजस को शामिल किया गया है, उसकी स्थापना वर्ष 1965 में की गई थी जिसका आदर्श वाक्य था तीव्र और निर्भय. पाकिस्तान के साथ 1971 की जंग में इस Squadron की अहम भूमिका रही थी. ये Squadron 15 अप्रैल 2016 से पहले तक मिग-27 विमान उड़ा रही थी. इस Squardron को इसी वर्ष 1 अप्रैल को फिर से शुरु किया गया था. 

तेजस से लैस 18वीं Squadron को Flying Bullets यानी उड़ती हुई गोली नाम दिया गया है. वर्ष 2016 में भारतीय वायुसेना में तेजस विमानों को पहली बार औपचारिक रूप से 45वीं Squadron में शामिल किया गया था. 

तेजस की पहली Squadron का नाम Flying Daggers रखा गया है, जिसका अर्थ होता है उड़ने वाला खंजर. इन Squadrons को ये नाम, तेजस की ताकत और खूबियों को ध्यान में रखकर ही दिया गया है. जिसे दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू विमान होने का गौरव हासिल है. 

देखें DNA- 

तेजस का ढांचा, कार्बन फाइबर से बना हुआ है. जिसकी वजह से ये अन्य धातुओं से बनने वाले विमानों की तुलना में काफी हल्का होता है. इसका कुल वजन लगभग 6560 किलोग्राम है. ये विमान करीब 13 मीटर लंबा और करीब साढ़े चार मीटर ऊंचा है. हल्का होने की वजह से तेजस 50 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है. इसकी अधिकतम रफ्तार 1350 किलोमीटर प्रतिघंटा है. तेजस को उड़ान भरने के लिए 500 मीटर से भी कम रनवे की जरूरत पड़ती है. तेजस में Air To Air Missile, लेजर गाइडेड मिसाइल और मेक इन इंडिया के तहत बनी अस्त्र मिसाइलें इसकी ताकत हैं. 

देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर. ये बात मेड इन इंडिया, हल्के लड़ाकू विमान तेजस पर बिलकुल फिट बैठती है. मैंने खुद दो वर्ष पहले मार्च 2018 में बेंगलुरु स्थित Hindustan Aeronautics Limited यानी HAL की वर्कशॉप में जाकर, तेजस की खूबियों को अपनी आंखों से देखा था और तेजस में बैठकर उसकी ताकत को भी महसूस किया था. इसलिए आज तेजस पर आधारित पुरानी रिपोर्ट को याद करते हुए, आप भी उसके शौर्य को एक बार फिर क़रीब से महसूस कीजिए. 

[source_ZEE NEWS]
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