DNA ANALYSIS: पानी में रहकर भी ‘विनायकी’ का दर्द नहीं हुआ कम

नई दिल्ली : इंसानों को शुरू से ही अपनी आजादी से बहुत प्यार रहा है. इस आजादी के नाम पर ही इंसानों ने तमाम अधिकार हासिल किए, इनमें अभिव्यक्ति का अधिकार, कुछ भी खाने पीने का अधिकार, अपने तरीके से जीवन जीने का अधिकार शामिल है. आप जितने चाहें उतने अधिकार अपने पास रखें.  लेकिन क्या इसमें किसी की हत्या करने का अधिकार भी शामिल हो सकता है ? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं. क्योंकि आप कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन किसी की जान लेने का अधिकार आपको नहीं है. इंसान को पृथ्वी पर श्रेष्ठ प्राणी माना गया है, लेकिन केरल में विनायकी (हथिनी) के साथ जो हुआ उसने इस श्रेष्ठता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

विनायकी को जलते हुए पटाखों से भरा अनानास खिला दिया गया था और कुछ इंसानों की इस हरकत की वजह से उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी. यह उस राज्य में हुआ है, जहां 93 प्रतिशत साक्षरता है, लेकिन इसके बावजूद वहां कुछ लोगों ने 100 प्रतिशत क्रूरता और शून्य प्रतिशत मानवता दिखाई. गर्भवती विनायकी की हत्या ने समाज के तौर पर हमें आईना दिखाया है और पृथ्वी पर सर्वश्रेष्ठ प्राणी होने के हमारे घमंड को गलत साबित किया है. हमारे देश में मानव अधिकारों की खूब बात होती है, अभिव्यक्ति की आजादी की बात होती है और कुछ लोग छीन कर लेंगे आजादी के नारे भी लगाते हैं, लेकिन जिस दिन छीन कर लेंगे आजादी का ये नारा जानवरों ने लगाना शुरू कर दिया उस दिन इंसानों के सभी मानव अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी और असहनशीलता और लालच पाताल लोक में चले जाएंगे. जो लोग जानवरों से ऐसी क्रूरता करते हैं, उन्हें 2020 के सबक से भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. इंसान ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, कोरोना वायरस उसी का नतीजा है. इसलिए अब भी सबको समझ जाना चाहिए कि असीमित आजादी  ठीक नहीं है. केरल की गर्भवती हथिनी के साथ जो किया गया, उसकी वजह यही असीमित आजादी है.

अब तक आपने इंसानों को न्याय दिलाने के लिए चलाए गए बहुत सारे अभियानों के बारे में देखा और सुना होगा. आप खुद भी कभी ना कभी इन अभियानों का हिस्सा बने होंगे. ज़ी न्यूज़ ने भी ऐसे बहुत सारे अभियान शुरू किए थे, लेकिन गुरुवार को ज़ी न्यूज़ ने एक जानवर को न्याय दिलाने के लिए एक नए अभियान की शुरुआत की है. हाथी को भारतीय संस्कृति में देवता स्वरूप माना जाता है. भगवान गणेश का एक नाम विनायक भी है, मान्यता यह भी है कि भगवान गणेश के देवी स्वरूप को विनायकी कहते हैं, इसलिए ज़ी न्यूज़ ने इस हथिनी का नाम विनायकी रखा है.

विनायकी के लिए इस अभियान को देश भर से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. केरल से लेकर कश्मीर तक लोग अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं और ज़ी न्यूज़ की मुहिम #Justice For Vinayaki से जुड़ रहे हैं.  इस हथिनी को इंसाफ दिलाने की मुहिम में ज़ी न्यूज़ ने केरल के जनम टीवी का भी सहयोग लिया है. इस साझा मुहिम की वजह से हमें इस हथिनी के आखिरी वक्त के कुछ नए वीडियो मिले हैं. ज़ी न्यूज़ की टीम भी केरल में उस जगह पर पहुंच चुकी है, जहां पर इस हथिनी की हत्या हुई. हमारा मकसद यही है कि इसको हर हालत में इंसाफ मिले. इसकी ऐसी दशा करने वालों को हर हालत में कड़ी सजा मिले.

हथिनी दर्द से बेचैन थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी जान बचाने के लिए वह क्या करे. नदी के किनारे पत्थरों पर वह भागती है. इसी के बाद वह नदी में चली जाती है, जिससे  पानी में रहकर दर्द को कम कर सके और अपने पेट में पल रहे बच्चे को शायद बचा सके. यही सोच कर वह नदी के पानी में खड़ी हो गई थी. लेकिन पानी में रहकर भी शरीर का असहनीय दर्द कम नहीं हुआ था. इसके बाद आसपास लोगों की भीड़ बढ़ गई थी. कई लोग सोच रहे थे कि कैसे इस हथिनी की जान बचाई जाए.  हर तरह की कोशिश के बाद हथिनी खुद भी हताश हो चुकी थी और  कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आ रही थी. ऐसा लग रहा था कि वह समझ चुकी थी कि अब जान नहीं बच पाएगी. वहां मौजूद लोगों ने उने निकालने की कोशिश की.  दो हाथियों को बुलाया गया, जिससे वह मिलकर हथिनी को पानी से बाहर खींच कर लाएं, लेकिन इस कोशिश का भी कोई फायदा नहीं हुआ. वहां मौजूद लोगों ने रस्सी के सहारे उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन यह कोशिश भी कामयाब नहीं हुई. हथिनी की हिम्मत पूरी तरह से टूट चुकी थी, लोगों की भी हिम्मत टूट गई.  आखिरकार हथिनी ने वहीं दम तोड़ दिया. इसके बाद क्रेन बुलाई गई और रस्सी में बांधकर इसको बाहर निकाला गया.

 
ये ज़ी न्यूज़ की मुहिम का असर है कि इस हथिनी की हत्या की जांच के मामले में केरल सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एसआईटी की 8 सदस्यीय टीम हथिनी की हत्या की जांच करेगी. इस मामले में पशु क्रूरता कानून और Explosive Act के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह घटना केरल में पल्लकड़ और मल्लपुरम जिले के बॉर्डर की है. शुरुआती जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि विस्फोट की वजह से हथिनी के मुंह में घाव हुए थे. उसके जबड़े टूट गए थे, इसी वजह से वह  कई दिनों से भोजन नहीं कर सकी थी. कई दिनों से भूखे होने की वजह से वह कमज़ोर हो गई थी. इसलिए दर्द से बेचैन होकर जब वो पानी में गई, तो बाहर निकल नहीं पाई. हथिनी के शरीर के अंदर काफी पानी चला गया था और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था. पूरे देश में जब इस हथिनी की मौत पर गुस्सा दिखा, केंद्र सरकार ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी, तो एक दिन बाद केरल के मुख्यमंत्री ने यह कहा कि इस मामले में इंसाफ मिलेगा, तीन संदिग्धों की पहचान हुई है, जिसके आधार पर जांच हो रही है। 

यहां सवाल सिर्फ एक जानवर और उसकी हत्या का नहीं है, सवाल उन लाखों करोड़ों जानवरों का भी है जिन्हें इंसान कभी अपनी भूख शांत करने के लिए मार डालता है तो कभी अपनी खुशी के लिए जानवरों पर अत्याचार करता है. यानी खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने वाला इंसान अपने लालच की वजह से जानवरों से उनके अधिकार और आजादी छीन लेता है. इस मादा हाथी की हत्या को लेकर पूरे देश में रोष है और देश की हस्तियां इसे लेकर सोशल मीड़िया पर भी बड़ी-बड़ी बातें लिख रही हैं. यहां एक बात पर ध्यान देना जरूरी है और वह यह है कि ऐसी दर्द भरी मौत एक हाथी की हो या किसी दूसरे जानवर की दोनों को दर्द एक जैसा होता है. हम यहां यह नहीं कह रहे कि आप अपने खाने पीने की आदतें बदल दें, लेकिन यह जरूर सोचें कि जब कोई जानवर आपकी भूख शांत करने के लिए मारा जाता है तो उसे भी उतना ही दर्द होता है, जितना विनायकी को हुआ होगा. इसलिए आप जीवन में जो भी करें उसे संवेदना के साथ करें और अगर आप के मन में हिंसा की जगह संवेदना ले लेगी तो शायद आप अपना जीवन जीने का तरीका भी बदल देंगे.

[source_ZEE NEWS]
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