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DNA ANALYSIS: देश में कोरोना के मामले एक लाख के पार, क्या बढ़ेगी गरीबी और बेरोजगारी?

नई दिल्ली: भारत में लॉकडाउन के करीब दो महीने होने वाले हैं. इसके बावजूद संक्रमण के मामले एक लाख के पार हो चुके हैं. हमारा नाम दुनिया के उन 11 देशों में आ गया है, जहां अब तक एक लाख से ज्यादा केस मिल चुके हैं. 

हमारे यहां संक्रमण की रफ्तार ऐसी रही है कि पहले 25 हजार केस आने में 87 दिन लगे थे. लेकिन अगले 25 हजार मामले सिर्फ 11 दिन में आ गए. इसके बाद 50 हजार से 75 हजार मामलों तक पहुंचने में सिर्फ 7 दिन लगे. लेकिन संक्रमण के मामले 75 हजार से एक लाख के पार होने में सिर्फ 5 दिन लगे. सिर्फ यही नहीं भारत उन कुछ देशों में शामिल है, जहां पिछले कुछ दिनों में संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा तेजी से बढ़े हैं. 

भारत में पिछले दो दिन में ही करीब 10 हजार नए मामले आ चुके हैं. यहां पिछले एक हफ्ते से हर दिन औसतन करीब 45 सौ मामले आ रहे हैं. इस मामले में अब भारत से आगे सिर्फ अमेरिका, ब्राज़ील और रूस हैं. अमेरिका में हर दिन औसतन करीब 24 हजार नए मामले आ रहे हैं. ब्राजील में ये आंकड़ा करीब 13 हजार का है. रूस में करीब 10 हजार नए मामले रोजाना आ रहे हैं.

करीब दो महीने के लॉकडाउन में जब ये स्थिति हो गई है, तो आप सोचिए कि अगर लॉकडाउन ना होता, तो भारत का क्या हाल होता. इसे आप इस तरह से समझिए कि भारत में 100 से एक लाख केस होने में 62 दिन लगे हैं, जबकि अमेरिका में 25 दिन में एक लाख केस आ गए थे. स्पेन में 29 दिन में, रूस में 44 दिन में, फ्रांस में 45 दिन में एक लाख मामले आ गए थे. 

भारत में लॉकडाउन ना होता तो अभी आपको जो एक लाख केस दिख रहे हैं, वो 20 लाख या उससे भी ज्यादा होते. फिर लाखों की संख्या में इतने मरीजों को संभाल पाना भारत क्या, किसी भी देश के सिस्टम के बस में ना होता. लेकिन जिस तरह से दुनिया के हर देश की आर्थिक सेहत खराब हो चुकी है, उसमें संपूर्ण लॉकडाउन अब किसी के लिए भी विकल्प नहीं रह गया है, कि वो सब ठप करके बैठ जाए. इसीलिए आप देख रहे हैं कि भारत ही नहीं दुनिया के अधिकतर देश धीरे धीरे नियमों में छूट दे रहे हैं. इस नई रणनीति में हमारे लिए वो बातें काम आने वाली हैं, जो बातें अब तक के लॉकडाउन में हमारे पक्ष में रही हैं. आने वाले दिनों में इन्हीं पर हम और बेहतर काम कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर मौत का ही आंकड़ा लें तो भारत में अब तक करीब 31 सौ लोगों की मौत हो चुकी है. 

देखें DNA- 

लेकिन मृत्यु दर के हिसाब से देखें तो संक्रमण शुरू होने के इतने दिन बाद भी मृत्यु दर तीन प्रतिशत के ही आसपास है, जबकि दुनिया में ये आंकड़ा 6 प्रतिशत से भी ज्यादा है. हमने आपको कल भी बताया था कि भारत में मरीजों के ठीक होने की दर शुरुआत के 15 प्रतिशत से बढ़कर अब 38 प्रतिशत के करीब हो चुकी है. यानी 100 में से अब 38 मरीज इलाज के बाद ठीक हो जाते हैं.

अगर संक्रमण के कुल मामलों की बात करें, और दुनियाभर का औसत निकालें तो दुनिया में एक लाख लोगों में 60 लोग संक्रमण का शिकार है, जबकि भारत में एक लाख की आबादी में सिर्फ 7 लोगों में ही संक्रमण पाया जा रहा है. हर 10 लाख की आबादी पर भारत में सिर्फ 73 मामले आ रहे हैं, जबकि स्पेन, इटली, फ्रांस, UK जैसे देशों में ये आंकड़ा डेढ़ हजार से दो हजार तक का है. 

इन आंकड़ों के साथ हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि अब भारत ने टेस्टिंग भी बढ़ा दी है. अब तक 24 लाख से ज्यादा टेस्ट हो चुके हैं. सोमवार को पहली बार एक दिन में एक लाख से ज्यादा टेस्ट किए गए. अगर हम इसी तरह से टेस्ट करते रहें, इसी तरह से सतर्क रहें और लॉकडाउन के नियमों में मिली रियायतों को पूरी छूट मानकर मनमानी ना करें तो फिर हम जान और जहान दोनों को बचा ले जाएंगे. 

देश में नए रुप, नए रंग और कई सारी रियायतों के साथ लॉकडाउन 4.0 लागू हो चुका है. जिसके लिए कई सारे अधिकार, राज्य सरकारों को दिए गए हैं, जबकि कई दिशा-निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी किए हैं. जिनका पालन करना हर राज्य सरकार के लिए जरूरी है. लेकिन अभी भी कई लोगों को ये भ्रम है कि क्या खुला है और क्या बंद है. तो सबसे पहले ये जान लीजिए कि लॉकडाउन 4.0 में क्या-क्या बंद रहेगा. 

सभी तरह की धार्मिक सभाओं पर रोक रहेगी. सभी धार्मिक स्थल भी बंद रहेंगे. राजनीतिक कार्यक्रमों की इजाजत नहीं दी गई है. रैली, जुलूस या धरना नहीं कर सकते. सांस्कृतिक कार्यक्रमों की इजाजत भी नहीं है. विमान सेवाएं, मेट्रो ट्रेन और यात्री ट्रेनें नहीं चलेंगी. स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थाएं भी बंद रहेंगी. मॉल, जिम, स्विमिंग पूल और थियेटर भी बंद रहेंगे. 

अब आपको बताते हैं कि केंद्रीय गृहमंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक किन किन चीजों को शर्तों के साथ छूट दी गई है. शर्तों के साथ शादी समारोह की इजाजत दी गई है, शादी में 50 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकते. अंतिम संस्कार में 20 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकते. होटल-रेस्टोरेंट खुल गए हैं लेकिन सिर्फ होम डिलीवरी की इजाजत मिली है. बैठकर खाना नहीं खा सकते. व्यापारिक गतिविधियों को छूट दी गई है लेकिन फैक्ट्री और दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा. 

लेकिन ये सभी रियायतें, सिर्फ ओरेंज और ग्रीन जोन में लागू होंगी. रेड जोन और कंटेनमेंट एरिया में नहीं. साथ ही ट्रेनें चलाने का फैसला सिर्फ केंद्रीय गृहमंत्रालय का होगा जिसमें राज्य सरकारें किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं. लेकिन कई मामलों में राज्य सरकारों को भी निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है. जैसेकि बाजार और दुकानें खोलने के वक्त का फैसला राज्य सरकारें कर रही हैं. राज्य में बसें चलाने का फैसला करने का अधिकार भी राज्यों के पास है. राज्यों के बीच बसें चलाने का फैसला भी राज्य सरकारें आपसी सहमति से करेंगे. निजी वाहनों में कितने यात्रियों को एक साथ यात्रा की अनुमति देनी है, ये भी राज्य सरकारें तय करेंगी. वहीं रेड, ओरेंज और ग्रीन जोन तय करने का फैसला लेने का हक भी राज्यों को दिया गया है. 

लॉकडाउन के चौथे चरण में लोग ये जानने को सबसे ज्यादा उत्सुक हैं कि क्या वो एक राज्य से दूसरे राज्य जा सकेंगे. तो आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने अभी इंटर स्टेट बसों के संचालन की अनुमति नहीं दी है. हालांकि हरियाणा सरकार ने दिल्ली के लिए सीमित बस सेवा शुरु करने का फैसला किया है. झारखंड सरकार ने अन्य राज्यों के लिए परिवहन सेवाएं शुरु करने का ऐलान कर दिया है. 

ये वो राज्य हैं, जहां की सरकारों ने लॉकडाउन 4.0 को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं. हालांकि इमरजेंसी पास और एसेंसियल सर्विस से जुड़े लोगों को देशभर में, एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की इजाजत मिलती रहेगी. देश के ज्यादातर शहरों में काफी हद तक जन जीवन सामान्य हो गया है और अर्थव्यवस्था को भी फिर से खोला जा रहा है लेकिन कोविड-19 के असर से निपटने में पूरी दुनिया को अभी लंबा समय लग सकता है और अर्थव्यवस्थाओं के लिए तो आगे का रास्ता और भी मुश्किल होने वाला है. 

WORLD ECONOMIC FORUM ने आज एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक दुनिया को अभी लंबे समय तक आर्थिक मंदी में रहना होगा. WEF ने ये रिपोर्ट एक सर्वे के आधार पर तैयार की है. इस सर्वे में 347 रिस्क मैनेजर्स को शामिल किया गया था. रिस्क मैनेजर्स वो लोग होते हैं जो अर्थव्यवस्था और निवेश पर आने वाले खतरे का आंकलन करते हैं. 

इनमें से करीब 69 प्रतिशत रिस्क मैनेजर्स ने माना है कि कोविड-19 की वजह से दुनिया में आर्थिक मंदी का दौर काफी लंबा चलेगा. इन विशेषज्ञों में से 56 प्रतिशत का अनुमान है कि बड़े पैमाने पर छोटे और बड़े उद्योग धंधे दीवालिया हो सकते हैं. 56 प्रतिशत रिस्क मैनेजर्स का अनुमान है कि कुछ देशों में कुछ विशेष उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो सकते हैं. 49 प्रतिशत ने माना है कि इसके बाद बेरोजगारी तेजी से बढेगी और खासकर युवा बड़ी संख्या में बेरोजगार हो जाएंगे. 49 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि सामान और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध आगे भी जारी रहेंगे. 

46 प्रतिशत रिस्क मैनेजर्स के मुताबिक दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारी घाटे में चली जाएंगी. 42 प्रतिशत का अनुमान है कि इस वायरस की वजह से ग्लोबल सप्लाई में बाधा आएगी और देशों के बीच व्यापार पहले की तरह आसान नहीं होगा. 38 प्रतिशत विशेषज्ञों का अनुमान है कि दुनिया के विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो सकती हैं. 

38 प्रतिशत रिस्क मैनेजर्स मानते हैं कि कोविड-19 की वजह से साइबर हमले बढ़ जाएंगे और बड़े पैमाने पर डाटा की चोरी भी होने लगेगी. 31 प्रतिशत का अनुमान है कि कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ सकते हैं या फिर किसी नए वायरस से ऐसा ही संक्रमण फैल सकता है. 

अब आप कुछ आंकड़ों से समझिए कि फिलहाल कोविड-19 की वजह से दुनिया की क्या स्थिति है. करीब 50 करोड़ लोगों के गरीब हो जाने का खतरा है. 

दुनिया की GDP की विकास दर 3 प्रतिशत तक कम हो सकती है. पहले इसके तीन प्रतिशत रहने का अनुमान था. लेकिन अब ये माइनस 3 में जा सकती है. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में 13 से 32 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. विदेशी निवेश में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. मार्च महीने से लेकर अब तक दुनिया के 80 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के 34 प्रतिशत लोगों ने माना है कि इस लॉकडाउन का असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है. अनुमान के मताबिक अगर बेरोजगारी एक प्रतिशत भी बढ़ती है तो इसके मुकाबले 2 प्रतिशत लोग पहले से ज्यादा बीमार हो जाते हैं. 

 

[source_ZEE NEWS]