DNA ANALYSIS : दिल्ली दंगों की चार्जशीट से खुली टुकड़े-टुकड़े गैंग की पोल

नई दिल्ली : दिल्ली में तीन महीने पहले किस तरह से दंगों की प्लानिंग की गई थी, इसका सच अब सामने आ रहा है. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में वही बातें बताई गई हैं, जो बातें दंगों के वक्त ही ज़ी न्यूज़ देश के सामने लेकर आया था. दिल्ली पुलिस ने इन दंगों में अंकित शर्मा की हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल की है. आपको याद होगा कि 26 वर्ष के अंकित शर्मा की चांदबाग इलाके में हत्या करके उसके शव को नाले में फेंक दिया गया था। अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में काम करते थे और उनकी हत्या के पीछे आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और पार्षद ताहिर हुसैन की साजिश बताई गई थी.

चार्जशीट में भी यही बातें कही गई हैं कि अंकित शर्मा की हत्या के पीछे गहरी साजिश थी. ताहिर हुसैन और उसके लोगों ने खासतौर पर अंकित को निशाना बनाया. ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि अंकित शर्मा उस इलाके में जाना-पहचाना नाम था. अंकित 25 फरवरी की शाम 5 बजे ताहिर हुसैन के घर के बाहर जुटे दंगाइयों को समझाने के लिए गया था, क्योंकि ताहिर के घर से ही ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे. उस वक्त ताहिर हुसैन अपने घर पर ही था और वह भीड़ को लोगों की हत्या करने के लिए उकसा रहा था. ताहिर ने ही अंकित को पकड़ने के लिए भीड़ को उकसाया. उसके उकसावे पर 20 से 25 दंगाइयों ने अंकित शर्मा को पकड़ लिया और उसे खींचकर चांदबाग पुलिया के पास लेकर गए, जहां पर अंकित की हत्या की गई थी.

इन दंगाइयों के हाथों में ईंट-पत्थर, लोहे की रॉड, लाठी-डंडे और चाकू थे. दंगाइयों ने अंकित शर्मा को पहले पीटा, फिर चाकुओं से कई वार किए और हत्या करके अंकित के शव को पास के ही नाले में फेंक दिया. इसी नाले से अगले दिन अंकित शर्मा का शव मिला था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक अंकित शर्मा के शरीर पर 51 घाव थे. अंकित के शव को नाले में फेंकते हुए दंगाइयों का एक वीडियो भी पुलिस को मिला था. पुलिस ने अंकित के हत्यारों के खून से सने कपड़े और हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद किया. अंकित पर चाकू से हमला करने वाले का नाम सलमान है, जो इस केस में मुख्य आरोपी है. चार्जशीट के मुताबिक सलमान ने कबूल किया है कि उसने अंकित पर चाकू से कई वार किए थे और अपने साथियों के साथ मिलकर उसने अंकित के शव को नाले में फेंक दिया था. अंकित के मर्डर केस में दस आरोपी हैं, और ये सभी जेल में हैं.

अंकित की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन की साजिश होने की बात ज़ी न्यूज पहले दिन से कर रहा था. दिल्ली दंगों की चार्जशीट ने टुकड़े टुकड़े गैंग और डिज़ायनर पत्रकारों की पोल खोल दी है. ताहिर हुसैन ने ना सिर्फ अंकित शर्मा की हत्या की साजिश रची थी, बल्कि चांदबाग के दंगों का पूरा प्लान बनाया था. लेकिन जब ये दंगे हुए थे और ताहिर हुसैन का नाम आया था, तब बड़े-बड़े पत्रकारों ने ताहिर हुसैन का बचाव करना अपना फर्ज मान लिया था. लेकिन यह ज़ी न्यूज ही था, जिसने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए पहले दिन से ही यह कहा था, कि चांदबाग के दंगों का आयोजक ताहिर हुसैन ही है और दंगे सुनियोजित साज़िश के तहत कराए गए थे. करीब तीन महीने बाद दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भी यही कहा गया है कि ताहिर हुसैन और टुकड़े-टुकड़े गैंग की मिली-जुली साजिश से दिल्ली में दंगे करवाए गए.

 

चांदबांग के दंगों के मामले में जो चार्जशीट दाखिल की गई, उसके मुताबिक दंगे करवाने के लिए ताहिर हुसैन ने अपनी फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च किए थे. ताहिर हुसैन नागरिकता कानून के विरोधी प्रदर्शनकारियों के संपर्क में था. उसने दंगों से पहले 8 जनवरी को जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से शाहीन बाग के धरने में मुलाकात भी की थी, जहां उमर खालिद ने उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे के वक्त कुछ बड़ा करने यानी दंगे के लिए तैयार रहने को कहा था. ताहिर हुसैन को यह भी बताया गया था, कि इस काम में जो पैसे लगेंगे, उसमें कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन PFI के सदस्य भी मदद करेंगे. चार्जशीट के मुताबिक यह योजना बनाई गई थी कि जब डोनाल्ड ट्रम्प भारत दौरे पर दिल्ली में होंगे उसी वक्त दिल्ली में दंगे करवाए जाएंगे, जिससे ये बात पूरी दुनिया में फैल जाए. यानी ताहिर हुसैन और टुकड़े-टुकड़े गैंग दंगे करवाने के लिए मिलकर काम कर रहे थे.

चार्जशीट में ताहिर हुसैन और उसके भाई सहित 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है. इसमें यह भी बताया गया है कि दंगे भड़काने के लिए चांदबाग में ताहिर हुसैन के घर में पेट्रोल बम और पत्थर इकट्ठा किए गए थे. चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि 24 और 25 फरवरी, यानी जिन दो दिनों में चांदबांग में दंगे हुए, उन दोनों दिन ताहिर हुसैन अपने घर पर ही था. ताहिर हुसैन की अगुवाई में ही भीड़ उसके घर से पत्थर और पेट्रोल बम फेक रही थी और फायरिंग भी कर रही थी. दंगों से ठीक पहले ताहिर हुसैन ने अपने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद करवा दिए थे. ताहिर हुसैन के पास लाइसेंसी पिस्टल थी और 100 कारतूस थे, लेकिन वह इनमें करीब 36 कारतूसों का हिसाब नहीं दे पाया कि इनका इस्तेमाल इसने कहां किया था.

आपको याद होगा कि चांदबाग दंगे के मामले में जब ताहिर हुसैन का नाम आया था, तो ये खुद को बेगुनाह बता रहा था और हमारे मीडिया का एक वर्ग ताहिर हुसैन की बातों पर भरोसा करके उसे क्लीन चिट भी दे रहा था. लेकिन ज़ी न्यूज से ताहिर हुसैन का एक एक सच देश को उसी वक्त बता दिया था, जब ये दंगे हुए थे. ज़ी न्यूज की रिपोर्टिंग आखिरकार सच साबित हुई है.

[source_ZEE NEWS]
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