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DNA ANALYSIS: टीवी-लैपटॉप और मोबाइल को जिंदगी का कितना समय दे रहे हैं आप?

नई दिल्ली: पिछले करीब 2 महीनों से पूरा भारत लॉकडाउन में था. हालांकि अब इसमें रियायतें मिलने लगी हैं और लोग अपने काम काज पर वापस लौट रहे हैं. लेकिन इस दौरान लोगों ने अपना सबसे ज्यादा समय मोबाइल फोन और दूसरी डिजिटल डिवाइजों और TV देखते हुए बिताया है. क्या आप जानते हैं लॉकडाउन हो या ना हो, एक वयस्क व्यक्ति अपने जीवन के 34 साल मोबाइल फोन और दूसरे डिवाइस की स्क्रीन को देखते हुए ही बिता देता है. 

ब्रिटेन में 2 हजार लोगों पर किए गए एक रिसर्च के मुताबिक 18 से 80 वर्ष तक के लोग साल में औसतन 4 हजार 866 घंटे गैजेट्स के साथ बिताते हैं. इस हिसाब से 18 से 80 वर्ष की उम्र का हर व्यक्ति जीवन भर करीब 3 लाख 1 हजार 733 घंटे मोबाइल फोन, लैपटाप, गेमिंग डिवाइस और TV देखते हुए बिता देता है. ये समय 34 वर्ष के बराबर है. 

इस सर्वे के मुताबिक मोबाइल फोन पर लोग हर दिन औसतन 2 घंटे 25 मिनट बिताते हैं. ये साल भर में 882 घंटे और 5 मिनट के बराबर है. 

लैपटाप पर लोग प्रतिदिन औसतन 4 घंटे एक मिनट बिताते हैं. साल भर में ये स्क्रीन टाइम 466 घंटे और 5 मिनट के बराबर हो जाता है. 

TV देखते हुए लोग औसतन हर दिन 3 घंटे 30 मिनट बिताते हैं जो साल भर में 1 हजार 277 घंटे और 30 मिनट टीवी देखने के बराबर है. 

देखें DNA- 

ऑनलाइन किताबें पढ़ने पर लोग औसतन सिर्फ 42 मिनट हर रोज बिताते हैं यानी साल भर में 255 घंटे और 30 मिनट. टैबलेट पर लोग 1 घंटा 39 मिनट औसतन खर्च करते हैं, ये साल भर में 602 घंटे और 25 मिनट के बराबर है. 

गेमिंग डिवाइस पर बीतने वाला औसतन समय 1 घंटा और तीन मिनट है. यानी पूरे वर्ष लोग औसतन 383 घंटे और 15 मिनट तक गेम्स खेलते हैं. 

कुल मिलाकर हर दिन लोग औसतन 13 घंटे और 20 मिनट किसी ना किसी गैजेट की स्क्रीन को घूरते रहते हैं, जो साल भर में 4 हजार 866 घंटे के बराबर है. 

Cybermedia Research के मुताबिक भारत के लोग फिलहाल साल भर में औसतन 1800 घंटे अपने मोबाइल फोन पर बिताते हैं. ये 75 दिनों के बराबर है. लेकिन एक अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च फर्म के मुताबिक वर्ष 2024 तक भारत के लोग प्रति दिन 255 मिनट मोबाइल फोन्स पर बिताने लगेंगे. ये 4 घंटे 25 मिनट के बराबर है. 

यानी भारत में 18 से 80 वर्ष के लोग अपने जीवन के 12 साल औसतन सिर्फ मोबाइल फोन पर बिताने लगेंगे.  इनमें दूसरे डिवाइस और गैजेट्स शामिल नहीं हैं. अगर बाकी चीजों को भी इसमें छोड़ दिया जाए तो हो सकता है कि इस मामले में भारत ब्रिटेन के लोगों से भी आगे निकल जाए. 

 

[source_ZEE NEWS]