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DNA ANALYSIS: जेहाद के खिलाफ ZEE NEWS की मुहिम को दुनियाभर में मिला समर्थन

नई दिल्ली: जेहाद के विषय पर ZEE NEWS ने कुछ बड़े लेखकों और विशेषज्ञों से बात की. इन लोगों ने जेहाद को लेकर कई मशहूर पुस्तकें भी लिखी हैं. 

इस देश में जेहाद के खिलाफ बोलने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए. आपने ये देख लिया है कि जेहाद के खिलाफ बोलने पर कैसे एक खास सोच वाले लोग संगठित होकर सक्रिय हो जाते हैं. कैसे ये लोग डराते-धमकाते हैं, FIR करते हैं और जेल भेजने के मिशन में जुट जाते हैं. इसलिए इन लोगों का सामना करना आसान नहीं है. ये मुश्किल और लंबी लड़ाई है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि इस लड़ाई में आपका साथ हमें कमजोर नहीं पड़ने देगा. 

जेहाद के खिलाफ इस लड़ाई ने पीढ़ियों का फर्क भी मिटा दिया है. हमें अपनी इस मुहिम में बुजुर्गों से लेकर छोटे छोटे बच्चों तक का साथ मिल रहा है. 

जब किसी मुहिम को बच्चों और बुज़ुर्गों से समर्थन मिलने लगे, तो समझ लीजिए कि देश बदल रहा है. ये तस्वीरें उन लोगों को भी देखनी चाहिए, जो जेहाद के खिलाफ बोलने पर हमें डरा-धमका कर चुप करना चाहते हैं.

हम आपको गुजरात के राजकोट से आए ऐसे ही संदेश के बारे में बताते हैं. जिसमें एक बुजुर्ग पति-पत्नी ने इस लड़ाई में हमें आशीर्वाद दिया है. ये आशीर्वाद ही हमारी ताकत है.

देश के कोने-कोने से हमारे लिए ऐसे हजारों संदेश आ रहे हैं, जिसमें छोटे-छोटे बच्चे ZEE NEWS की आवाज बन रहे हैं और हमें समर्थन दे रहे हैं. ये जनता की असली आवाज है, ये असली समर्थन है, इसमें कोई PR नहीं है. 

हम आपको ऐसे ही दो और संदेशों के बारे में बताना चाहते हैं. एक संदेश 98 वर्ष की बुज़ुर्ग महिला सुशीला सालथिया का है, जो जम्मू की रहने वाली हैं और DNA की नियमित दर्शक हैं, उन्होंने अपना आशीर्वाद मुझे दिया है और दूसरा संदेश एक बच्चे का है, जिसका नाम निशेश चौधरी है. 

हमें मिला ये समर्थन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें खुशी इस बात की है कि हमें ये समर्थन बिना किसी PR के और बिना बड़े-बड़े विज्ञापन दिखाए मिला है. 

ये भी देखें- 

ये आप सभी लोगों का विश्वास है, जिससे जेहाद Vs ZEE NEWS के अभियान को देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में समर्थन मिल रहा है. सच्चाई की इस आवाज को पूरी दुनिया सलाम कर रही है. अमेरिका हो, इंग्लैंड हो या फिर दुनिया के दूसरे देश हों, दुनिया में जहां-जहां भारतीय बसे हैं, वो इस बात के खतरे को समझते हैं कि अगर आज हम जैसे पत्रकारों का मुंह बंद कर दिया गया, तो फिर भारत में वो पत्रकारिता नहीं बचेगी, जिस पत्रकारिता में राष्ट्रहित की बात की जाती है.

इसलिए हमें दुनियाभर के प्रवासी भारतीयों की प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं जिनसे हमें किसी भी चुनौती से लड़ने का नया जज्बा मिला है. 

आप सभी की शक्ति उन लोगों की ताकत से कहीं ज्यादा है, जो लोग सच बोलने पर ZEE NEWS को चुप कराना चाहते हैं. हमारे साथ आप लोग खड़े हैं, इस देश की जनता खड़ी है, दुनियाभर के प्रवासी भारतीय हमारे साथ हैं, इस समर्थन ने हमारे इरादों को और मजबूत कर दिया है. 

कई वरिष्ठ पत्रकारों का समर्थन हमें लगातार मिल रहा है. इसमें वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया, वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता का नाम शामिल हैं. 

कोई विचार सबको पसंद आए, ये नहीं हो सकता. यही इस देश के लोकतंत्र की खूबसूरती भी है, कि मतभेद का अधिकार सबको है. लेकिन किसी विचार के लिए पत्रकार को मुकदमेबाजी में उलझाना, उसे जेल भेजने पर जोर लगाने, उसे लगातार धमकियां देना, कोई भी इस पर चुप कैसे बैठ सकता है. हमारे पास सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की प्रतिक्रिया भी आई है. उन्होंने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की. 

हमारी मुहिम को देखकर, हमारी हिम्मत को देखकर हमें लगातार समर्थन मिल रहा है. इनमें आम लोगों से लेकर नेता, पत्रकार और विचारक भी शामिल हैं. वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने भी हमें अपना समर्थन दिया है. 

हमने शुक्रवार को DNA में जेहाद का असली मतलब बताया था, और ये कहा था कि सही अर्थ में जेहाद के जो मायने हैं, उनसे हमारे देश के आम मुस्लिमों को हमेशा दूर रखा जाता है. हमने बताया था कि जेहाद का शाब्दिक अर्थ है पवित्र युद्ध, जिस परिभाषा को गलत तरीके से पेश किया जाता है. इस पवित्र युद्ध को धर्म युद्ध बताकर दुनियाभर में इसका गलत इस्तेमाल होता है. 

लेकिन हमने जेहाद के सही अर्थ के बारे में क्या बताया, इस्लाम और धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार हमारी हंसी उड़ाने लगे, उन्हें ये दिखने लगा कि हमने धर्म परिवर्तन कर लिया है, ऐसे लोग जेहाद का सही अर्थ बताने पर हमें इस्लाम से जोड़ने लगे. और ये कहने लगे कि एक एफआईआर के डर से हम जेहाद का मतलब समझाने लगे.

इसी सोच की वजह से जेहाद का मतलब समझाने वाली DNA की क्लिप को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया. कई ऐसे नेता और तथाकथित बुद्धिजीवियों ने ट्विटर पर इस क्लिप्स पर लाइक्स, कमेंट और रीट्वीट किए. इन लोगों में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू जैसे नाम शामिल हैं.

इन लोगों से सवाल ये है कि अगर कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति इस्लाम धर्म के बारे में कुछ बताएगा तो क्या वो मुस्लिम हो जाएगा. इसी तरह अगर कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति हिंदू धर्म के बारे में कोई बात समझाएगा, तो क्या वो हिंदू हो जाएगा. ये लोग इसी बात से खुश हो रहे हैं, कि हमने जेहाद का असली अर्थ बता दिया. 

असल में जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं, वो लोग, इस देश में अभिव्यक्ति की आजादी भी चाहते हैं और अंदर ही अंदर ये भी चाहते हैं कि ये देश इस्लामिक राष्ट्र बन जाए. इन लोगों से किसी हिंदू का इस्लाम पर टिप्पणी करना या उसके बारे में समझाना अच्छा नहीं लगता. सोचिए ऐसी सोच वाले लोग जब बड़े-बड़े पदों पर बैठ जाएं, मंत्री-मुख्यमंत्री बन जाएंगे, तो ये किस तरह का व्यवहार करेंगे. 


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