DNA ANALYSIS: कोरोना के बाद भारत में ‘टिड्डी टेरर’ का खौफ, झुंड बनाकर कर रहीं घुसपैठ

नई दिल्ली: ऐसे वक्त में जब देश, कोरोना वायरस से संघर्ष रहा है, तब देश के कई राज्यों में एक और हमला हुआ है. ये हमला किया है टिड्डियों ने. जो बिन बुलाए मेहमानों की तरह लाखों-करोड़ों की संख्या में झुंड बनाकर देश में घुसपैठ कर चुकी हैं. 

भारत में टिड्डियों की ये घुसपैठ पाकिस्तान से हुई है. लेकिन इसकी शुरुआत अफ्रीका से हुई. जहां से टिड्डियों के ये झुंड यमन पहुंचे और फिर ईरान से होते हुए अप्रैल के महीने में पाकिस्तान में पहुंचे थे. पाकिस्तान में तबाही मचाने के बाद राजस्थान और गुजरात के रास्ते टिड्डियों के ये झुंड भारत में दाखिल हुए और अब उत्तर भारत में तबाही मचा रहे हैं. 

राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लाखों हेक्टेयर फसल और पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाने के बाद अब टिड्डियों ने उत्तर प्रदेश में भी एंट्री कर ली है. जिन्होंने लाखों हेक्टेयर जमीन पर फसलों को बर्बाद कर दिया है. राजस्थान में ही अबतक 5 लाख हेक्टेयर भूमि पर फसलों को नुकसान हो चुका है और मध्य प्रदेश में भी 17 जिलों में काफी बर्बादी हुई है.

वैसे भारत में टिड्डियों का हमला एक वार्षिक आफत है. मई 2019 से फरवरी 2020 तक टिड्डियों के दल, दो हजार से ज्यादा बार भारत में घुसे थे, लेकिन टिड्डियों का अबतक का सबसे बड़ा हमला वर्ष 1993 में हुआ था. जब एक वर्ष में करीब 172 बार टिड्डियों के झुंडों ने फसलों और वनस्पति को नुकसान पहुंचाया था. तब खेती की तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर पकी फसलों को टिड्डियों ने बर्बाद कर दिया था, और अब 26 वर्ष बाद, देश पर टिड्डियों ने इतना बड़ा हमला किया है.

हमारे पास कई जगहों से टिड्डियों के हमलों की तस्वीरें आईं हैं जिनके आधार पर हमने एक ग्राउंड रिपोर्ट भी तैयार की है, जिसे आज हम आपको दिखाएंगे. जिसके बाद हम आपको टिड्डियों से जुड़े हर उस सवाल का भी जवाब देंगे, जिनको आप ये रिपोर्ट देखने के बाद, जरूर जानना चाहेंगे.

देखें DNA- 

लाखों-करोड़ों की संख्या में उड़ते, टिड्डियों के ये दल किसानों के लिए आतंकवादियों से कम नहीं हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कई जिलों में इन टिड्डियों ने आतंक मचाया हुआ है. 

आगरा, उत्तर प्रदेश  के जिला कृषि अधिकारी डॉ. राम प्रवेश ने कहा कि कृषि विभाग किसानों के साथ काम कर रहा है . टिड्डियों का दल दिखाई देता है तो किसान अपने मंडल कृषि अधिकारी को जानकारी दें. यह मैं अपील कर रहा हूं. सामूहिक रुप से इन टिड्डियों पर नियंत्रण पाने के लिए कृषि विभाग तैयार है. मगर किसान सावधानी बरतें.

भारत में सीरियल अटैक करते टिड्डियों के ये दल ईरान के रास्ते पाकिस्तान से होते हुए भारत पहुंचे हैं. जिन्होंने पहले राजस्थान और गुजरात में फसलों को नुकसान पहुंचाया. फिर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश पहुंचकर कहर ढाया और अब ये उत्तर प्रदेश में भी आतंक मचा रहे हैं.

पेड़ों पौधों और फसलों के पत्ते, फूल, फल, बीज हजारों लाखों टिड्डियां एक साथ धावा बोलती हैं और चंद मिनटों में सबकुछ बर्बाद कर देती हैं.

इन्हें भगाने के लिए किसान कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं. थाली पीटकर टिड्डियों को भगाने का प्रयास कर रहे हैं. कई जगह पर खेतों में धुआं करके भी टिड्डियों से निजात पाने की कोशिशें की जा रही हैं.

लेकिन लाखों करोड़ों टिड्डियों के आगे ये सारी कोशिशें कुछ ज्यादा असर नहीं दिखा पा रही हैं. 

राजस्‍थान में तो टिड्डियों ने गांवों के अलावा शहरों पर भी धावा बोल दिया है. जहां के 16 जिले टिड्डियों के आतंक से प्रभावित हैं. जयपुर के कई रिहायशी इलाकों में तो टिड्डियों ने ऐसा कब्जा किया है कि लोग घरों से बाहर निकलने तक में डर रहे हैं. 

टिड्डियों के इन अथाह समंदर के अटैक का भी एक तय पैटर्न होता है. जिसकी वजह से भारत में तेजी से ये एक के बाद एक कई राज्यों को अपनी चपेट में ले चुके हैं..

टिड्डियां एक दिन में सौ से दो सौ किलोमीटर तक की दूरी तय कर लेती हैं. इनके आगे बढ़ने की दिशा, हवा की गति पर निर्भर करती है. 

ये सभी तरह के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं. ये शाम छह बजे से 8 बजे तक पेड़ों, झाड़ियों और फसलों पर जाकर बैठ जाते हैं और सुबह तक वहीं बैठे रहते हैं. यही वो वक्त होता है जब इनपर काबू पाया जा सकता है. 

झांसी, उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारी आंद्रा वामसी ने कहा कि टिड्डी दल की सक्रियता रात में नहीं होती है, रात में ये टिड्डी दल आराम कर रहे थे, निगरानी समिति ने ग्राम पंचायतों, कृषि विभाग की टीमों और भारत सरकार की आई टीमों के साथ मिलकर टिड्डियों पर केमिकल का छिड़काव कर इन्हें मारने का लक्ष्य रखा था, कल रात हमने टिड्डी दल पर केमिकल का छिड़काव किया जिससे 40 लाख से ज्यादा टिड्डी दल मारे गए हैं अनुमान है कि जनपद में कुल टिड्डियों में से आधे से ज्यादा मारी गई हैं. 

टिड्डियों के इन हमलों को रोक पाने में प्रशासन नाकाम हो रहा है. किसान खुद अपने खेतों को बचाने की कोशिशें तो कर रहे हैं लेकिन लाखों-करोड़ों टिड्डियों के हमले को नाकाम करना उनके लिए भी आसान नहीं है. जानकारों को तो अब इस बात का डर सता रहा है कि अगर इस समस्या पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो टिड्डियों के ये झुंड देश की राजधानी दिल्ली पर भी अटैक कर सकते हैं. 

ये रिपोर्ट देखने के बाद आपके मन में ये जानने की उत्सुकता जाग गई होगी कि आखिर ये टिड्डियां इतनी तबाही कैसे मचा सकती हैं. ये समझने के लिए आपको टिड्डियों के बारे में जानना होगा.

दुनिया भर में टिड्डियों की 10 हजार से ज्यादा प्रजातियां हैं, भारत में इस वक्त जो प्रजाति सक्रिय है, वो रेगिस्तानी टिड्डियां हैं. टिड्डियां, अंटार्कटिका को छोड़कर सभी प्रायद्वीपों पर पाई जाती हैं. 

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक टिड्डियां, दुनिया की दस फीसदी आबादी की जिंदगी को प्रभावित करती हैं. जिसकी वजह से इन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक कीट भी कहा जाता है. 

आसमान में उड़ते हुए टिड्डी दलों में, दस अरब टिड्डियां तक हो सकती हैं. जो एक दिन में 13 से 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से करीब 200 किलोमीटर तक का रास्ता तय कर सकती हैं.

एक सेंटीमीटर से लेकर चार सेंटीमीटर लंबी टिड्डियां, हर दिन अपने वजन के बराबर यानी करीब दो ग्राम खाना खा सकती हैं. एक वर्ग किलोमीटर में फैला टिड्डियों का झुंड, एक दिन में इतना भोजन कर सकता है जितने में 35 हजार लोगों का पेट भर सकता है. एक मादा टिड्डी अपने जीवन में कम से कम तीन बार अंडे देती है और एक बार में 95 से 158 अंडे तक दे सकती है.

एक टिड्डी का जीवन, आमतौर पर तीन से पांच महीने का होता है. टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए उनपर केमिकल्स का छिड़काव किया जाता है, और ये तब होता है जब शाम के वक्त टिड्डियां एक जगह पर आराम करने के लिए बैठती हैं. 

टिड्डियों का हमला, दुनिया के लिए कोई नई बात नहीं है. लेकिन इस वर्ष, टिड्डियों के हमले तेजी से बढ़े हैं. ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं कि जिन देशों में बेमौसम बरसात हुई है, वहां नमी पाकर टिड्डियों की तादाद, तेजी से बढ़ी हैं. पिछले कुछ महीनों के दौरान, दुनिया के साठ से ज्यादा देश, टिड्डी दलों के हमलों को झेल चुके हैं या झेल रहे हैं. पाकिस्तान तो टिड्डियों के आगे घुटने टेकने की स्थिति में पहुंच गया है जहां इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जा चुका है और अब भारत में भी टिड्डियों के हमले तेजी से बढ़ रहे हैं. 

[source_ZEE NEWS]
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