DNA ANALYSIS: अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस ने कितना असर डाला?

नई दिल्ली: भारत की आर्थिक विकास दर के नए आंकड़े भी आ गए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की GDP की विकास दर 4.2 प्रतिशत रही. ये पिछले 11 वर्षो में आर्थिक विकास की सबसे कम रफ्तार है. वित्त वर्ष 2019-20 के पहले क्वार्टर में भारत की आर्थिक विकास दर 5.2 प्रतिशत थी. जो दूसरे क्वार्टर में घटकर 4.4 प्रतिशत और तीसरे क्वार्टर में घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई. लेकिन चौथी और अंतिम तिमाही में ये गिरकर सिर्फ 3.1 प्रतिशत रह गई. यानी इस साल जनवरी से मार्च महीने के बीच भारत की अर्थव्यस्था सिर्फ 3.1 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी. कुल मिलाकर इस वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यस्था 4.2 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी है जबकि 2018-19 में भारत की विकास दर 6.1 प्रतिशत थी. 

भारत में मार्च के आखिरी हफ्ते में पहले लॉकडाउन का ऐलान हुआ था. और उसी के असर की वजह से आखिरी तिमाही में आर्थिक विकास दर कुछ कम हुई है. लेकिन अप्रैल और मई में भारत में तमाम उद्योग धंधे पूरी तरह से बंद रहे इसलिए आने वाली तिमाही में विकास दर और कम रहने का अनुमान है. 

इसी दौरान भारत सरकार का वित्तीय घाटा भी बढ़कर GDP का 4.59 प्रतिशत हो गया है. सरकार का लक्ष्य इस घाटे को 3.8 प्रतिशत तक रखना था.

इसे अंग्रेजी में Fiscal Deficit भी कहते हैं. ये सरकार की कमाई और उसके खर्च के बीच का अंतर होता है. यानी अगर सरकार 100 रुपए कमा रही है तो उसे करीब 104 रुपए और 59 पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. इसके तहत सरकार ने इस साल 31 मार्च तक 18 लाख 50 हजार करोड़ रुपए कमाने का लक्ष्य रखा था लेकिन सरकार को हासिल हुए सिर्फ 16 लाख 82 हजार करोड़ रुपए.

भारत की आर्थिक विकास दर कम जरूर हुई है लेकिन GDP के ये आंकड़े पूर्व में लगाए गए अनुमानों से काफी बेहतर हैं.
उदाहरण के लिए भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank Of India ने इस साल जनवरी और मार्च के बीच GDP के 1.2 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान लगाया था. इसी तरह The Asian Development Bank का आंकलन था कि 2019-20 में भारत की आर्थिक विकास दर 4 प्रतिशत रहेगी जबकि अब ये 4.2 प्रतिशत है. हालांकि बजट से पहले केंद्र सरकार का आंकलन था कि 2019-20 में भारत की GDP 5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ेगी और ताजा आंकड़ों में विकास दर कुछ कम है. लेकिन कई देशों की तुलना में भारत की स्थिति अब भी काफी बेहतर है. 

भारत की विकास दर अनुमान से सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम हुई है जबकि इसी दौरान अमेरिका की अर्थव्यस्था में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है. इस साल की पहली तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका की अर्थव्यवस्था इस समय माइनस में है. 

भारत के पड़ोसी देश चीन की हालत तो और भी ज्यादा खराब है. इस साल के शुरुआती तीन महीनों में चीन की GDP 6.8 प्रतिशत तक घट गई. चीन ने 1992 से GDP के आंकड़े जारी करना शुरू किया था और ये तब से लेकर अब तक आई सबसे बड़ी गिरावट है. 

आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 1987 तक भारत और चीन की GDP लगभग बराबर थी. लेकिन आज चीन की GDP भारत से 5 गुना ज्यादा है. लेकिन अब कोरोना वायरस ने भारत को ये स्थिति फिर से बदलने का अवसर दे दिया है. 

इस साल की पहली तिमाही में जर्मनी की अर्थव्यवस्था भी 2.2 प्रतिशत तक सिकुड़ गई है. फ्रांस की GDP विकास दर भी जनवरी से मार्च के बीच 5.8 प्रतिशत तक कम हो गई. ये फ्रांस की GDP में वर्ष 1949 के बाद से आई सबसे बड़ी गिरावट है. 

इसी दौरान स्पेन की GDP की विकास दर में 5.2 प्रतिशत की कमी आई है. ये स्पेन में करीब 100 वर्षों में आई सबसे बड़ी आर्थिक गिरावट है. जबकि इसी दौरान इटली की GDP सिर्फ 0.1 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ी. 

यानी जिस समय दुनिया के ज्यादातर देशों की आर्थिक विकास दर माइनस में है या पूरी तरह ठहर चुकी है, उस समय भारत में आर्थिक विकास दर पॉजिटिव में बनी हुई है. हालांकि अगले क्वार्टर के आंकड़े जब जारी होंगे, तब लॉकडाउन के असर का सही अंदाजा लगाया जा सकेगा. Reserve Bank Of India यानी RBI भी कह चुका है कि आने वाले समय में भारत की आर्थिक विकास दर माइनस में भी जा सकती है. 

इससे पहले वर्ष 1957-58, 65-66, 1972-73 और 79-80 में भारत की आर्थिक विकास दर माइनस में जा चुकी है, और अगर अगले वित्त वर्ष में भी ये विकास दर माइनस में रहती है तो करीब 30 वर्षों में ये पहला मौका होगा जब भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ने की बजाय घटने लगेगी. 

लेकिन 2019-20 का वित्त वर्ष ज्यादातर आंकलनों को गलत साबित करने में सफल रहा है और उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसा ही कुछ अगले वित्त वर्ष में भी हो जाए. लेकिन क्या ऐसा संभव हो पाएगा? ये जानने के लिए आज हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगी चैनल WION ने देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बात की. इस दौरान वित्त मंत्री ने GDP के नए आंकड़ों और पांचवे लॉकडाउन की रूप रेखा को लेकर क्या कहा ये आपको सुनना चाहिए.

देखें DNA-

आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी देश के लोगों से संवाद करने के लिए नए आइडिया लेकर आते हैं. इस बार प्रधानमंत्री राष्ट्र के नाम एक खुले पत्र के जरिए देश से संवाद करेंगे. 30 मई यानी कल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने वाला हैं और इसे लेकर प्रधानमंत्री ने एक पत्र लिखा है जो देश के 10 करोड़ लोगों के घरों तक पहुंचाया जाएगा और ये पत्र देश के प्रमुख अखबारों में भी छपेगा, और इसे News चैनलों पर भी दिखाया जाएगा. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम के पांच मंत्री भी सरकार की उपलब्धियों पर पत्र के जरिए संवाद करेंगे. इनमें अमित शाह, राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद और पीयूष गोयल का नाम शामिल है. 

 

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