Current Topic: Corona और कर्फ्यू का आदेश, जानिए कर्फ्यू से जुड़े सवालों के जवाब

इस समय कोरोना महामारी के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में कर्फ्यू के हालात चल रहे हैं। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में कर्फ्यू से जुड़े बहुत से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ऐसे में यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ-साथ यह आर्टिकल आम जनता के लिए भी अत्यधिक उपयोगी होगा।

– डॉ. धर्मेन्द्र भटनागर (आइएएस, से.नि.)
आप राजस्थान प्रशासनिक अभिकरण, जयपुर के सदस्य हैं और ओटीएस में आइएएस व आरएएस अधिकारियों को कानून के प्रशिक्षण से जुड़े हैं। आपकी दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

वैश्विक महामारी कोविड-19 के संकट काल में केंद्र सरकार द्वारा लागू देशव्यापी लॉकडाउन विश्व के इतिहास में सबसे बड़ा सरकारी लॉकडाउन है । इस लॉकडाउन में महामारी रोग अधिनियम 1897,संबंधित ऑर्डिनेंस, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 आदि कानूनों के प्रावधानों का उपयोग कर आमजन पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि कोरोना संक्रमण नियंत्रित रहे। कोरोना वायरस के संकट के दौरान जहां संक्रमण के बहुत फैल जाने से हॉट स्पॉट बन गए हैं वहां कर्फ्यू आदेश लागू किए जा रहे हैं। नागरिकों के जीवन की रक्षा करना सरकार का सर्वोपरि दायित्व है। ठीक ही कहा गया है -“जान है तो जहान है”। यही नहीं लोगों के स्वास्थ्य तथा क्षेम को खतरों से बचाना अत्यावश्यक है। सही कथन है कि “पहला सुख निरोगी काया”।

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय 10 ग – में धारा 144 न्यूसेंस या आशंकित खतरे के अर्जेंट मामलों में आदेश जारी करने की असाधारण शक्तिका प्रावधान करती है। इस धारा के तहत कर्फ्यू लगाया जाता है।

कर्फ्यू के संबंध में निम्न बिंदु उल्लेखनीय हैं
कर्फ्यू शब्द का उल्लेख दंड प्रक्रिया संहिता में कहीं नहीं है। यह शब्द डिक्शनरी से लिया गया है एवं मीडिया की देन है। जहां कर्फ्यू लगाया जाता है वहां के निवासियों को अपने घर से बाहर निकलना प्रतिबंधित कर दिया जाता है।

1. कर्फ्यू लगाने के आधार : कोरोना के परिप्रेक्ष्य में मानव जीवन स्वास्थ्य या क्षेम को आसन्न खतरे के अर्जेंट मामले में निवारण हेतु कर्फ्यू लगाया जाता है।

2. कर्फ्यू आदेश जारी करने के लिए सक्षम अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट/अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट पूरे जिले में या उसके किसी भाग या थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा सकेंगे। उपखंड मजिस्ट्रेट पूरे उपखंड में या उसके किसी भाग या थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा सकेंगे राज्य सरकार द्वारा इस हेतु सशक्त कोई कार्य पालक मजिस्ट्रेट अपने क्षेत्राधिकार में कर्फ्यू लगा सकेगा। पुलिस आयुक्त/अपर पुलिस आयुक्त पूरे पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र या उसके किसी क्षेत्र या थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा सकेंगे। पुलिस उपायुक्त – अपने पूरे क्षेत्राधिकार में या किसी थाना क्षेत्र या अन्य क्षेत्र में कर्फ्यू लगा सकेंगे।

3. कर्फ्यू लगाने की पुरोभाव्य शर्त : कर्फ्यू लगाने की पुरोभाव शर्त यह है कि ऐसी विकट परिस्थितियां विद्यमान हों जिनमें तत्काल कार्रवाई करना अत्यावश्यक हो।

4. मामले में सारभूत तत्वों से संतुष्टि : कर्फ्यू लगाने वाले मजिस्ट्रेट/पुलिस आयुक्त को मामले के सारभूत तत्वों से संतुष्ट होना आवश्यक है। उसे कर्फ्यू के लिखित आदेश में इनका उल्लेख अवश्य करना चाहिए। इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार के कोरोनावायरस संबंधी निर्णयों आदेशों, निर्देशों वह मार्गदर्शक सिद्धांतों आदि का हवाला दिया जाना चाहिए।

5. आदेश एकपक्षीय हो सकेगा : कर्फ्यू आदेश आपात की दशाओं में ऐसी परिस्थितियों में जहां नोटिस की तामील की गुंजाइश नहीं हो एकपक्षीय जारी किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि यह प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के उस सिद्धांत का अपवाद है- जिसके तहत प्रभावित पक्षकार को आदेश से पहले नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। कर्फ्यू आदेश की तामील/ सूचना संबंधित जनसमूह तक तामील कर, सूचनापट्ट पर लगाकर, मीडिया व सार्वजनिक प्रचार तंत्र द्वारा त्वरित रूप से दी जाती है ताकि उसकी तत्काल पालना सुनिश्चित की जा सके।

6. कर्फ्यू आदेश सुनिश्चित होगा : इसमें निम्न बातों का स्पष्ट उल्लेख होगा- : 1. आदेश किस स्थान पर लागू होगा 2.किन व्यक्तियों पर लागू होगा 3. आदेश किस अवधि व समय में लागू होगा।

7. कर्फ्यू आदेश की अवधि : मजिस्ट्रेट/पुलिस आयुक्त द्वारा जारी आदेश की अधिकतम अवधि 2 माह हो सकेगी । राज्य सरकार आवश्यक मामले में आदेश की अवधि 6 माह तक और बढ़ा सकती है। इस प्रकार कर्फ्यू आदेश अधिकाधिक आठ माह तक प्रभावी रह सकेगा।

8. कर्फ्यू आदेश की प्रकृत्ति: यह आदेश अस्थाई होता है, स्थाई नहीं। आदेश प्रतिषेधात्मक होता है जिसमें घर से बाहर निकलने की मनाही होती है। यह आदेश आज्ञापक या कोई कार्य करने के निर्देश देने वाला नहीं हो सकता। आदेश निवारक होता है ना कि दंडात्मक। आदेश मनमाना व अतिवादी नहीं होना चाहिए और इसे लागू करने का तरीका न्यायोचित होना चाहिए।

9. कर्फ्यू आदेश में ढील : कर्फ्यू लागू करने वाले अधिकारी द्वारा कर्फ्यू के दौरान आवश्यकतानुसार शर्तों में ढील तथा छूट दी जा सकती है। अत्यावश्यक कार्य हेतु प्रभावित व्यक्तियों को पास जारी किए जा सकते हैं।

10. कर्फ्यू आदेश का पुनरीक्षण (रिवीजन): कर्फ्यू आदेश लोकहित में जारी अत्यंत महत्वपूर्ण, आपातिक एवं संवेदनशील होता है। अत: सामान्यत: न्यायपालिका एक नियम के रूप में इसमें हस्तक्षेप नहीं करती है। कतिपय अपवाद स्वरूप मामलों में जहां कानूनी त्रुटि या कमी गंभीर व स्पष्ट हो और जिससे घोर अन्याय हो रहा हो, वहां न्याय हित में कर्फ्यू आदेश में संबंधित सैंशंस न्यायाधीश या उच्च न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण करते हुए हस्तक्षेप किया जा सकता है।

11. कर्फ्यू आदेश की अवज्ञा : इस आदेश की अवज्ञा करना भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध है।

उपर्युक्त धारा के तहत अपराध को संज्ञेय बनाया गया है जिसमें पुलिस अवज्ञा करने वाले व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है। अभियुक्त के विरुद्ध अभियोजन चलाया जा सकता है। कोविड19 संकट के दौरान लागू कर्फ्यू की अवज्ञा करने पर यदि उससे मानव जीवन स्वास्थ्य या क्षेम को संकट कारित होता है या होना संभाव्य है तो अभियुक्त को सिद्ददोष होने पर सक्षम न्यायालय द्वारा 6 माह तक के कारावास या रु. 1000 तक के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाए। उल्लेखनीय है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत कर्फ्यू लागू करने के बजाय अन्य आवश्यक प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। उदाहरणार्थ- 5 से अधिक व्यक्ति एक स्थान पर एकत्र नहीं होंगे। कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर नहीं थूकेगा। कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को स्पर्श नहीं करेगा आदि। इसे निषेधात्मक आदेश कहा जाता है।





























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