हाईकोर्ट में एक पिता की याचिका- बेटे की फीस, बिजली का बिल और ईएमआई माफ की जाए

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना वायरस के चलते बनी परिस्थितियों के कारण बेटे की फीस, बिजली का बिल और लोन की ईएमआई को माफ करने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका डाली गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इन मांगों पर फैसला लेने के आदेश दिए हैं।याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी जसवीर ने एडवोकेट फेरी सोफेट के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को अपनी मजबूरी बताई। याचिकाकर्ता ने बताया कि लॉकडाउन के कारण उसकी कमाई खत्म हो चुकी है उसके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे बेटे की कॉलेज फीस, बिजली का बिल और कार के लोन की ईएमआई देनी है। जब तक सब कुछ सही चल रहा था तब तक वह उस पर लागू होने वाले हर प्रकार के टैक्स का भुगतान करता था। अब जब यह संकट की स्थिति है तो सरकार को आगे आकर उसकी और उसके जैसे और लोगों की मदद करनी चाहिए।

फीस बिल और एमआई माफ की जाने चाहिए ताकी आम लोगों को राहत मिल सके। याचिकाकर्ता ने बताया कि अपनी इस मांग को लेकर उसने केंद्र सरकार को रिप्रजेंटेशन भी सौंपी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अब केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता द्वारा सौंपी गई रिप्रजेंटेशन पर जल्द से जल्द कानून के अनुरूप निर्णय ले।

कोरोना वायरस के चलते बनी परिस्थितियों के कारण बेटे की फीस, बिजली का बिल और लोन की ईएमआई को माफ करने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका डाली गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इन मांगों पर फैसला लेने के आदेश दिए हैं।

याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी जसवीर ने एडवोकेट फेरी सोफेट के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को अपनी मजबूरी बताई। याचिकाकर्ता ने बताया कि लॉकडाउन के कारण उसकी कमाई खत्म हो चुकी है उसके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे बेटे की कॉलेज फीस, बिजली का बिल और कार के लोन की ईएमआई देनी है। जब तक सब कुछ सही चल रहा था तब तक वह उस पर लागू होने वाले हर प्रकार के टैक्स का भुगतान करता था। अब जब यह संकट की स्थिति है तो सरकार को आगे आकर उसकी और उसके जैसे और लोगों की मदद करनी चाहिए।

फीस बिल और एमआई माफ की जाने चाहिए ताकी आम लोगों को राहत मिल सके। याचिकाकर्ता ने बताया कि अपनी इस मांग को लेकर उसने केंद्र सरकार को रिप्रजेंटेशन भी सौंपी लेकिन कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अब केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता द्वारा सौंपी गई रिप्रजेंटेशन पर जल्द से जल्द कानून के अनुरूप निर्णय ले।

Source AMAR UJALA

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