वाराणसी दहेज हत्या मामला: SC ने सास-ससुर को आत्मसमर्पण का आदेश दिया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वाराणसी के एक दहेज हत्या मामले में मृतका के सास-ससुर को चार सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने की आरोपियों की याचिका छह मार्च को खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी. ममता केसरी और अशोक केसरी मृतका के सास-ससुर हैं और दहेज हत्या के इस मामले में आरोपी भी हैं.

सुनवाई के दौरान वकील ने दलील दी कि जिस वक्त पीड़िता की तबीयत खराब हुई थी, पति-पत्नी बाहर घूमने गए थे. जब वे वापस आए तो उन्होंने ही उसे अस्पताल पहुंचाया था. उनके मुवक्किल ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं, उनका बिजली मीटर अलग है, रसोईघर भी अलग है. हत्या से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

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सुप्रीम कोर्ट ने वकील से पूछा कि क्या आपने रिपोर्ट देखी है. रिपोर्ट कहती है कि मृतका के गर्दन पर निशान थे. खंडपीठ ने कहा कि यदि आरोपी निर्दोष है, तो वे इतने दिनों से फरार क्यों हैं?

इस पर उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल कोरोना महामारी के कारण सामने नहीं आ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को पहले आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन वकील ने कोविड 19 का हवाला देकर 12 सप्ताह की मोहलत मांगी. न्यायालय ने इससे इनकार कर दिया, उसके बाद उन्होंने पहले आठ सप्ताह का समय देने की बात कही.

उनका आग्रह खंडपीठ ने एक बार और ठुकरा दिया, इसके बाद उन्होंने कम से कम छह सप्ताह की मोहलत दिए जाने का अनुरोध किया. अंतत: न्यायालय ने आत्मसमर्पण के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी. गौरतलब है कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी पुत्रवधु की हत्या के संबंध में वाराणसी के लंका पुलिस स्टेशन में गत वर्ष 17 अगस्त को दर्ज किए गए मामले को निरस्त करने की मांग इलाहाबाद उच्च न्यायालय से की थी, लेकिन वहां से राहत न मिलने के बाद इन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

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