मां गंगा अवतरण दिवस आज, निर्जला एकादशी कल

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ 1 जून दोपहर 2.57 बजे से 2 जून दोपहर 12.4 बजे तक

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 08:47 AM IST

जालंधर. हिंदू पचांग के अनुसार 2 जून को निर्जला एकादशी है, जोकि सभी 24 एकादशियों में से सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। निर्जला एकादशी का उपवास किसी भी प्रकार के भोजन और पानी के बिना किया जाता है। जो श्रद्धालु साल की सभी 24 एकादशियों का उपवास नहीं रख सकते, उनको केवल निर्जला एकादशी का उपवास करना चाहिए।

यह उपवास करने से दूसरी सभी एकादशियों का लाभ मिल जाता है। व्रत ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष के दौरान किया जाता है। आमतौर पर निर्जला एकादशी का व्रत गंगा दशहरा के अगले दिन पड़ता है। कई बार साल में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी दोनों एक ही दिन पड़ जाते हैं। 

101 यज्ञ करने के बराबर विशेष पूर्ण फल मिलता है 

गंगा दशहरे का पर्व हर साल जेष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, जो अबकी बार 1 जून को है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भागीरथ जी ने अखंड तपस्या करके माता गंगा को धरती पर अवरत किया था। सनातन धर्म में श्री गंगा दशहरा का बड़ा महत्व है। इस दिन गंगा स्नान. गंगा स्मरण और ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देने से 101 यज्ञ करने के बराबर विशेष पूर्ण फल प्राप्त होता है। हर प्राणी को प्रातः काल गंगा तट पर या किसी तीर्थ स्थान पर गंगाजल आदि से स्नान करके सुगंधित द्रव्य, नारियल, चावल, पुष्प आदि से पूजन करके दीपक जलाकर गंगा स्त्रोत मंत्र का पाठ करना चाहिए। 

इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं  

पं. गौतम भार्गव, विजय शास्त्री और पं. अनिल शुक्ला ने बताया की 2 जून दिन मंगलवार को निर्जला एकादशी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष भर की सम्पूर्ण एकादशियों का पुण्यफल का लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को पांच पांडवों में से भीमसेन ने की भी यही व्रत किया। इस कारण सभी इस एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन जो स्वयं निर्जल प्यासा रहकर ब्राह्मण को शुद्ध पानी से भरा घड़ा, फल अौर दक्षिणा आदि दान करता है, उसे पुण्या लगता है। इस दिन देश में जगह-जगह ठंडे पानी की छबीलें लगाई जाती है। 

Source BHASKAR

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