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महाराष्ट्र: Lockdown में शहीदों के परिजनों की मदद के लिए छोटे बच्चों की अनूठी मुहिम

अस्मिता यादव, मुंबई: मुंबई के कुछ स्कूली छात्र इस लॉकडाउन के दौरान घर बैठकर गेम खेलने से ज्यादा उन जवानों के परिवार की मदद में जुटे हैं जो हंदवाड़ा हमले में शहीद हो गए.

छोटे बच्चों का ये समूह अपनी-अपनी सोसाइटी में गाड़ियां धोता है और इससे जमा रकम को शहीद परिवार के नाम करना चाहता है. ये मुहिम चलाए हुए तकरीबन 3 हफ्ते हुए हैं और इन बच्चों ने 75000 से ज्यादा रकम जुटाई है.

दरअसल, इस मुहिम की शुरुआत 14 वर्ष के अनहद सिंह ने की जिसके बाद उससे प्रेरित होकर और भी कई बच्चे इस काम में जुट गए और उन्होंने भी इस मुहिम के साथ दिल लगाकर काम किया.

अनहद सिंह का कहना है, ‘ मैंने जब न्यूज़ सुनी कि  हंदवाड़ा में सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए हैं तो मुझे बहुत बुरा लगा. मैंने सोचा कि एक ओर जहां हम सब कोरोना से बचने  के लिए घर में बैठे हैं वहीं दूसरी ओर हमारी रक्षा और हमारे देश की रक्षा में जुटे जवान खुद की जिंदगी को दांव पर लगा रहे हैं, तब मैंने सोचा कि मुझे इनके लिए योगदान देना चाहिए, घर बैठने से अच्छा है कि मैं किसी के काम आऊं. इसलिए हमने यह मुहिम शुरू की.’

अनहद का कहना है, ‘हम सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन का पूरा ख्याल रखते हैं और मास्क पहनकर ही गाड़ी की सफाई करते हैं. हम एक गाड़ी साफ करने का ₹200 चार्ज करते हैं. अब तक हमने तकरीबन 75000 से ज्यादा रकम इकट्ठा की है. और लोगों के भी योगदान आ रहे हैं. मुझे यह काम करने में बहुत अच्छा लगता है और मैं अपना पूरा लॉकडाउन ऐसे ही लोगों की मदद करने में निकालना चाहता हूं.’

ये बच्चे अपनी ऑनलाइन क्लासेज खत्म करके तकरीबन 1 घंटा गाड़ी साफ करते हैं. उनमें से एक  रनान सेन का कहना है कि मैंने जब अनहद को  इस तरह गाड़ी साफ करके जवान के परिवार वालों की मदद करते हुए देखा तो मुझे लगा कि हम सभी ऐसे छोटे-छोटे इनीशिएटिव्स उठाकर बड़े काम कर सकते हैं.

 वहीं अनहद के पिता का कहना है कि मुझे इन बच्चों पर गर्व है और मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि सभी बच्चे अपना समय व्यर्थ न करें और इस समय का उपयोग किसी की मदद के लिए करें. इस वक्त हम सब को एक साथ मिलकर कठिन समय का सामना करना चाहिए.

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