प्रवासी लोगों ने दर-दर ठोकरें खाने के बाद डीसी दफ्तर घेरा

  • सड़कों पर भूखे बिताई रातें, प्रशासन ने नहीं ली सुध
  • रोजगार छूट गया, अब लाचारी की जंजीर में जकड़े मजदूर

दैनिक भास्कर

Jun 04, 2020, 04:24 AM IST

अमृतसर. जिला प्रशासन कोरोना संकट के बीच प्रवासियों को घर वापस भिजवाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चला रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रवासी ट्रेनें चलने के बाद भी 1 महीने से दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, जबकि उनके घर जाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही।

आलम यह है कि मजदूर सड़कों पर रातें काटने और दो वक्त की रोटी के लिए भटक रहा है। उन्होंने दुधमुंहे बच्चों की भूख की तड़प बर्दाश्त नहीं कर पाए तो सुबह 9 बजे ही डीसी दफ्तर के बाहर पहुंचकर घेराव करके प्रदर्शन किया।

प्रशासन ने सूचना मिलते ही अधिकारियों को मौके पर भेजा और पुलिस बल भी तैनात किया गया। बाद में अफसरों ने बच्चों के लिए दूध मंगवाया और लोगों के लिए खाने-पीने का प्रबंध किया। काफी देर के बाद अफसरों ने दोपहर सभी मजदूरों को घर वापस भेजने का आश्वासन देकर बसों से ब्यास स्थित राधा स्वामी सत्संग डेरा पहुंचाया।

प्रशासन विभिन्न राज्यों के प्रवासियों को भेजने के लिए अब तक 30 ट्रेनें चलवा चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ के प्रवासी अभी भी दर-दर की ठोकरें खा रहे। हैरान करने वाली बात है कि करीब 1200 से 1500 मजदूर रोटी के लिए तरसते रहे और सड़कों पर सो कर कई दिन तक गुजार दिया, लेकिन प्रशासन ने इनको लेकर आंखें बंद कर लीं।

प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग तो मेनटेन नहीं करवा पाया। सरोजनी, सुशीला आदि महिलाएं बताती हैं कि 3 महीनों से काम बंद होने के कारण दो जून की रोटी नसीब नहीं हो रही।

सोन कुंवर बताती हैं कि वह अपने 3 छोटे बच्चों के साथ 2 महीनों से मुसीबतें झेल रही है। कई रात बिना रोटी के काट दिए, लेकिन किसी को तरस नहीं आया। नोडल अधिकारी रजत ओबरॉय ने बताया कि ट्रेनों की व्यवस्था करके सभी प्रवासियों को घर वापस भेजा जाएगा। प्रशासन मजदूरों का वापस भिजवाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है।

Source BHASKAR

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