प्रवासी मजदूरों की कमी के चलते धान की बिजाई का रेट 50 फीसदी बढ़ा

  • 14 दिन बाद धान की बिजाई
  • रेट को लेकर किसान व लोकल मजदूर आमने-सामने

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 07:00 AM IST

धनाैला. 14 दिन बाद धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। लेकिन मजदूरों की कमी के चलते एक तो रेट बढ़ रहे हैं। साथ ही गांवों में बाहरी लेबर की कमी के चलते मजदूरों व किसानों में तकरार बढ़ने की संभावना है। पिछले साल धान की रोपाई 3 हजार से 3500 रुपए प्रति एकड़ थी।

लेकिन इस साल अभी से 5 हजार तक रेट पहुंच चुका है। लेकिन फिर भी लोकल मजदूरों व किसानों में बात नहीं बन रही। इस कोरोना वायरस को लेकर बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूर इस बार नहीं आ रहे हैं। दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों की कमी को लेकर किसान भी अब स्थानीय मजदूरों पर निर्भर होना तय है।

गांवाें में पंचायत, किसान जत्थेबंदी, मजदूरों को मिलकर कोई विकल्प नहीं मिल पा रहा। गांव अतरसिंह वाला के किसान सतनाम सिंह जवंधा का कहना है कि धान की रोपाई में इस बार मजदूरों की खूब कमाई होगी।

लॉकडाउन में इस बार बाहरी मजदूर यहां कामकाज के लिए नहीं आ रहे हैं। जो यहां ठहरे थे, वह भी वापस जा चुके हैं। इसलिए स्थानीय मजदूरों को होने वाली धान की रोपाई में भरपूर काम मिलेगा। पंजाब के बेराेजगार युवाओ काे आगे आना चाहीए। जिससे किसानों पर आने वाली समस्य से निजात मिल सके।

प्रशासन ने बाहर से मजदूर लाने का दिया है विकल्प

गत दिनों किसान नेता जगसीर छीनीवाल जिले के डीसी तेज प्रताप सिंह फूलका से मिले थे। उन्होंने कहा कि अगर किसान गांव स्तर पर मजदूरों की मांग करेंगे तो मजदूरों की संख्या के हिसाब से बाहरी प्रदेशों के जिला प्रशासन के साथ उनकी तरफ से तालमेल किया जाएगा।

यूपी के किसी जिले के डीसी दफ्तर से बरनाला के डीसी दफ्तर द्वारा तालमेल किया जाएगा। इससे वहां से मजदूरों को वहां के प्रशासन की मदद से विशेष बसों से जिले में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों की मदद के लिए प्रशासन को आगे आना चाहिए। किसान नेता ने मांग की कि मनरेगा के तहत काम कर रहे मजदूरों को धान की रोपाई पर लगाना चाहिए। जिसका आधा खर्च सरकार अदा करे व बाकी किसान अदा करेंगे।

इधर, खेतीबाड़ी अधिकारी डॉ. बलदेव सिंह ने कहा कि किसानों को सीधी बिजाई करनी चाहिए। सीधा बिजाई पर सरकार की 10 जून की कोई रोक नहीं है। न ही इस पर पानी की खपत होती है। बाहर से लबर न आने की समस्या का एकमात्र हल है कि किसान सीधी बिजाई की तरफ ध्यान दें।

Source BHASKAR

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