पंजाबियों के खून में है समाजसेवा की भावना, उसका ही असर मुझे पीछे नहीं हटने देता

  • मोगा निवासी सोनू सूद मुंबई में रहकर प्रवासी लोगों को उनके राज्यों में भेजने की व्यवस्था कर रहे
  • सोनू ने कहा, हम तब तक लगे रहेंगे, जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 07:48 AM IST

मोगा. (हरबिंदर सिंह भूपाल) कोरोना महामारी का असर भारत की नहीं पूरे विश्व पर पड़ा है। कई स्टार पीएम फंड देकर चर्चा में आए तो कई ऐसे हैं जो मानवता की सेवा करते देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

बाॅलीवुड स्टार और मूल रूप से मोगा के रहने वाले सोनू सूद इन दिनों गरीब प्रवासियों की मदद ही नहीं कर रहे, बल्कि वह मुंबई में फंसे हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए खाने से लेकर उन्हें उनके राज्यों में भेजने तक की व्यवस्था कर रहे हैं।

प्रवासी व जरूरतमंदाें की सेवा करने पर सोनू सूद बताते हैं कि मुझे नहीं पता, शायद माता- पिता के दिए संस्कार हैं। पंजाबियों के खून में समाजसेवा की भावना है। यह मेरे पंजाब और मोगा का असर है। क्योंकि जो लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, वो नहीं बदलते। मैं इनमें एक हूं।

उन्होंने कहा, हमारे मुंबई में होटल हैं। बेशक कोरोना के चलते बंद हैं। लेकिन जब पता चला कि हजारों प्रवासी मजदूर अपने घरों में लौटना चाहते हैं और वह पैदल जा रहे हैं। तब उनसे जाने के लिए बंदोबस्त करने का वादा किया। जब तक प्रबंध नहीं हुए उनके खाने-पीने की व्यवस्था की।

सोनू ने कहा कि हमने एक टोल फ्री नंबर जारी किया। इस पर 70,000 प्रवासियों ने जाने की इच्छा जताई। मेरे अकेले के लिए यह मुश्किल था। मैनें मोगा की साथी नीती गोयल जो मुंबई में रहती है को साथ लिया और मेरे सभी सीए 30-30 घंटे लगे रहे। लिस्टें बनाकर बसों का प्रबंध किया। मोगा से मेरी बहन मालविका सच्चर व जीजा ने भी जोश दिया। मेरी पत्नी और बच्चों ने हौसला दिया।

उन्होंने कहा कि पहले हमने हर रोज 45000 लोगों के खाने की ड्राइव चलाई थी। मैनें सोचा हमें घर बैठने की जरूरत नहीं जब तक फंसे लोगों को घर न पहुंचाया जा सके। इसलिए यह ड्राइव शुरू की। रास्ते में सभी राज्यों के सीएम को फोन करके उनके लिए रास्ते खुलवाए।

40 दिन 40 हजार लोगों को खाने और बसों का प्रबंध किया

सोनू सूद बताते हैं कि मैं किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा। मैं अकेले ही काम कर रहा हूं। मैनें फोन पर अलग-अलग राज्यों के रास्ते खुलवाए, जो शायद एक राजनेता के लिए भी आसान न होता। हमारी 10 लोगों की टीम है, जो कम है।

लॉकडाउन में दूर-दूर से लोगों को बुलाना कठिन है। फिर भी हम लगे रहेंगे, जब तक अंतिम प्रवासी अपने घर नहीं पहुंच जाता। अगर अच्छी सोच वाले लोग जुड़ जाएं तो अकेले ही बहुत कुछ किया जा सकता है। प्रवासियों को उनके घर पहुंचाने के लिए 40 दिन सोनू सूद ने 40 हजार लोगों के खाने और उनके लिए 50 बसों का प्रबंध किया। समय तो लगेगा लेकिन विश्वास है कि वे सभी घर पहुंचा जाएंगे।

Source BHASKAR

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