नांदेड़ में साधु शिवाचार्य की हत्या पर गुस्से में संत समाज, उद्धव से मांगा इस्तीफा

कन्हैया लाल शर्मा, मथुरा: पालघर के बाद अब नांदेड़ में साधु की हत्या का मामला सामने आया है. नांदेड़ (Nanded) में रविवार को साधु समेत 2 लोगों की हत्या कर दी गई है. साधु शिवाचार्य और भगवान शिंदे नाम के व्यक्ति का बाथरूम में शव मिला. दोनों की गला रेतकर हत्या की गई. एक महीने के भीतर निरपराध साधुओं पर जानलेवा हमले को लेकर महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर सवाल उठने लगे हैं.

ऐसे में वृंदावन का संत समाज बहुत गुस्से में है. वृंदावन के प्रमुख संतों ने साधुओं की हत्या के लिए महाराष्ट्र सरकार को दोषी ठहराया है.

धर्माचार्य बिपिन बापू का कहना है कि जो शिवाजी के पद चिन्हों पर चले, हिंदुत्व के हिमायती थे, राम और सनातन की बात करते हैं. उनके राज में अगर ऐसा होता है तो उनको गद्दी से स्वतः ही उठ जाना चाहिए.

जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज का कहना है कि सरकार को सख्त कदम उठाते हुए कोई कानून बनाना चाहिए.

वहीं काशी विद्वत परिषद के कार्ष्णि नागेंद्र महाराज ने कहा कि जब इस देश मे साधु-संतों की ही हत्या होगी तो सवाल उठेंगे ही. इसके लिए महाराष्ट्र की उद्धव सरकार दोषी है. जो संतों की हत्याओं को रोकने में नाकाम हुई है.

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अंतरराष्ट्रीय भागवत वाचक डॉक्टर मनोज मोहन शास्त्री ने बताया कि हृदय विरक्त हो उठता है, नींद नहीं आती है. केंद्र और राज्य सरकारों को चिंतन मनन करने की आवश्कता है.

दोनों घटनाओं पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. कानून का डर न होने की वजह से अपराधी बेखौफ वारदात को अंजाम दे रहे हैं. साधु-संतों की हितैषी होने का दावा करने वाली शिवसेना अपनी ही सरकार में साधुओं की हत्या पर लगाम नहीं लगा पा रही है.

पालघर मॉब लिंचिंग के दौरान तो पीड़ितों के साथ पुलिस भी थी, फिर भी उन्हें जान गंवानी पड़ी थी. इतना ही नहीं, घटना के वायरल वीडियो में पुलिस अपनी जान बचाकर भागती नजर आई थी. ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि प्रदेश की पुलिस भीड़ द्वारा किए गए हिंसात्मक अपराधों के आगे लाचार हो गई है और लोगों के जानमाल की हिफाजत के लिए अब उससे उम्मीद करना व्यर्थ है?

ऐसे ही नांदेड़ के मामले में भी संत की हत्या पर समुदाय के लोगों की प्रतिक्रिया सार्वजनिक तनाव का रूप ले सकती है. दोनों मामलों में अभी तक इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है तो इसके पीछे लॉकडाउन का बड़ा हाथ है. लोग घरों में कैद हैं, सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा जमकर निकल रहा है. इन घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेश की उद्धव सरकार को कई मुश्किल सवालों से गुजरना पड़ सकता है.

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