धमकियां डिगा नहीं सकीं, परचम लहराता रहा, Zee News का DNA 260 हफ्तों से लगातार नंबर-1

ZEE NEWS के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी को चाहें पाकिस्‍तान से लेकर दुबई तक जान से मारने की धमकियां मिल रही हों, चाहें निर्भीक एवं राष्‍ट्रवादी पत्रकारिता को दबाने के लिए उनके खिलाफ केरल में एफआईआर की गई हो लेकिन इन सबके बावजूद उनके सच कहने के साहस को लोगों ने सराहा है, अपनाया है. इसलिए लगातार 260 हफ्तों से सुधीर चौधरी का प्राइम टाइम न्‍यूज शो DNA देश में जनता की पहली पसंद बना हुआ है. इस शो में दिन भर की सबसे बड़ी घटनाओं के बहुआयामी कवरेज और विश्‍लेषण को जनता के समक्ष पेश किया जाता है. 

इसी से जुड़ा बड़ा सवाल ये भी है कि क्‍या समाचार परोसना ही काफी है? क्‍या उसके साथ सरोकार की बात नहीं की जानी चाहिए? क्‍या खबर के पीछे की सच्‍चाई और उसके निहितार्थ को जनता के समक्ष नहीं रखा जाना चाहिए? क्‍या इस तरह से सच को दबाने की स्‍याह मंशा रखने वाले डिजाइनर पत्रकारों का रुख सही है? ZEE NEWS के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी के नेतृत्‍व में उनका फ्लैगशिप न्‍यूज शो DNA (Daily News and Analysis) इन तर्कों से इतर राय रखता है.  ऐसा इसलिए क्‍योंकि सुधीर चौधरी का मानना है कि खबरों की बारीक रेशेनुमा पर्तों को उघाड़कर जनता से रूबरू कराना और आम बोलचाल की भाषा में उसके अर्थों को समझाना किसी भी न्‍यूज शो और पत्रकार का दायित्‍व है. संभवतया उनकी सच कहने की जिद और खास अंदाज में खबरों को बताने और समझाने के कारण ही 260 हफ्तों से टीआरपी की दुनिया में DNA पहले पायदान पर रुतबे से खड़ा है. 

Zee News के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी की अगुआई में 2013 में DNA शो शुरू हुआ था. सबके लिए न्‍यूज (News For All) के कॉन्सेप्ट पर आधारित इस शो ने भारतीय न्‍यूज इंडस्‍ट्री में पूरी तरह से क्रांति कर दी. यह शो इस थीम पर केंद्रित है कि ऐसी खबरें और उसका विश्लेषण व प्रभाव दर्शकों के समक्ष परोसा जाए जो आम आदमी के जीवन को छूता है. इसमें जम्‍मू और कश्‍मीर में जमीन जेहाद के माध्‍यम से डेमोग्राफी बदलने की साजिश का राजफाश करने वाली ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर यमुना किनारे जहरीली सब्जियों की खेती जैसे स्‍थानीय मुद्दों समेत सीरिया युद्ध जैसे वैश्विक मसलों को कवर किया गया. DNA ने हर महत्‍वपूर्ण स्‍टोरी पर अपनी नजर और ध्‍यान को रखा. एक महिला (निर्भया की मां) की अपनी बेटी के न्‍याय के लिए प्रधानमंत्री से गुहार से लेकर DNA ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर व्‍यक्ति (उम्र, लिंग, आय से परे) को छूने की कोशिश की.

इस सफलता का मूलमंत्र इस विश्‍वास में निहित है कि न्‍यूज को नारे (Jargon) की शक्‍ल से बाहर देखा जाए और न्‍यूज को विस्‍तृत तरीके से दर्शकों के समक्ष पेश किया जाए जिससे वे जुड़ सकें. लेकिन न्‍यूज को केवल व्‍यापक तरीके से पेश करना ही सब कुछ नहीं है बल्कि इसके साथ विश्‍वसनीयता की कसौटी सबसे अहम है. जी न्यूज इस मानदंड पर कभी कोई समझौता नहीं करता. 

लोकप्रियता का आलम
भारत में अलग-अलग भाषाओं के 400 से ज्यादा न्यूज़ चैनल्स हैं और न्यूज़ चैनल्स की इस भीड़ के बीच भी अकेले DNA को करोड़ों लोग हर रात 9 बजे से साढ़े 10 बजे तक देखते हैं. आंकड़ों के मुताबिक DNA की पहुंच करीब 18 करोड़ लोगों तक है. ये आंकड़े मार्च 2019 से फरवरी 2020 की रेटिंग पर आधारित हैं. औसतन 5 करोड़ से ज्यादा लोग हर महीने DNA देखते हैं और 2 करोड़ से ज्यादा लोग हर हफ्ते DNA में हमारे साथ जुड़ते हैं.

जबकि अमेरिका में Hannity (हैनिटी ) नामक सबसे मशहूर न्यूज़ शो को भी हर रात औसतन सिर्फ 33 लाख दर्शक ही मिल पाते हैं. दूसरे नंबर पर मौजूद “Tucker Carlson Tonight (टकर कार्सन टुनाइट) के दर्शकों की संख्या सिर्फ 31 लाख है और तीसरे नंबर पर मौजूद The Rachel Maddow Show (द रेचेल मेडो शो ) को करीब 27 लाख लोग हर रात देखते हैं. जबकि DNA को इन लोकप्रिय शोज़ के मुकाबले 2 से 3 गुना ज्यादा दर्शक देखते हैं.

सोशल मीडिया पर भी DNA के दर्शकों की संख्या बाकी शोज़ के मुकाबले बहुत ज्यादा है. ट्विटर पर हर महीने औसतन एक करोड़ लोग DNA से जुड़ते हैं और हर महीने करीब एक करोड़ 80 लाख लोग ट्विटर पर DNA की चर्चा करते हैं. इसी तरह हर महीने फेसबुक पर DNA देखने वालों की औसत संख्या करीब 12 करोड़ है और Youtube पर हर महीने DNA देखने वाले दर्शकों की संख्या करीब डेढ़ करोड़ है. इसके अलावा हज़ारों की संख्या में लोग DNA में दिखाई गई खबरों को एक दूसरे के साथ शेयर भी करते हैं. यानी हमें टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक जनता का भरपूर प्यार मिलता है और यही प्यार हमें हर रोज़ कुछ नया करने की हिम्मत और हौसला देता है.

[source_ZEE NEWS]
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