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दोस्तों के साथ पार्टी करने गए युवक की जहर से हुई मौत, केस दर्ज कराने में इंस्पेक्टर पिता को 3 साल लगे

  • नाभा में मोबाइल शॉप चलाता था इंस्पेक्टर मनजीत सिंह का बेटा शगनदीप सिंह
  • 14 मार्च 2017 को तीन साथियों के साथ पार्टी करने गया, बाद में सड़क किनारे मिला
  • प्राइमरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर पुलिस ने 174 की कार्रवाई की, हत्या के शक में दो साल बाद कराया पोस्टमॉर्टम

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 03:13 PM IST

नाभा. पटियाला जिले के नाभा शहर में पंजाब पुलिस की बड़ी लापरवाही की घटना सामने आई है। कार्रवाई में देरी का यह मामला किसी और का नहीं, बल्कि पुलिस के अपने अधिकारी से जुड़ा है। नाभा कोतवाली के एडिशनल एसएचओ मनजीत सिंह ने अपने ही विभाग पर आरोप लगाया है कि उनके बेटे की हत्या कर दी गई थी और इसमें अब जाकर केस दर्ज हुआ है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके पेट में ऑर्गेनोफास्फोरस नामक जहर मिला था।
पुलिस ने 174 के तहत कार्रवाई की थी
घटना 14 मार्च 2017 की है, जब इंस्पेक्टर मनजीत सिंह का मोबाइल शॉप चला रहा बेटा शगनदीप सिंह चौधरी माजरा गांव के जगजीत सिंह, धरमिंदर सिंह और एक अनजान व्यक्ति के साथ पार्टी के लिए गया था, लेकिन वापस नहीं लौटा। उसके पिता को एक राहगीर का फोन आया कि उसका लड़का सड़क किनारे पड़ा है। तो उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल दाखिल करवाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मनजीत सिंह को कोई सुराग नहीं मिला और पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद धारा 174 के तहत कार्रवाई की थी। हत्या के शक आधार पर हुए पोस्टमॉर्टम की दो साल से ज्यादा वक्त के फासले से 2019 में आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शगनदीप सिंह के पेट में ऑर्गेनोफास्फोरस नामक जहर मिला।

इंस्पेक्टर मनजीत अपने मरहूम बेटे शगनदीप, उसकी पत्नी और नन्ही बेटी की फोटो देखकर अक्सर फूट पड़ते हैं।

दुखी पुलिस इंस्पेक्टर मनजीत सिंह ने कहा कि मेरा सारा घर उजड़ गया, लेकिन बेटे का कत्ल करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस ने तीन साल में कार्रवाई नहीं की। पुलिस अफसर होते हुए भी इंसाफ के दर-दर की ठोकर खानी पड़ी। थाना सदर पुलिस ने कोई भी सुनवाई नहीं की। बेटे की मौत के बाद बहू डिप्रेशन में चली गई, जिसका इलाज करवाते रहे। बाद में उसे और छोटी बच्ची को मायके वाले ले गए।

Source BHASKAR