दिल्ली: प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना बेड्स की मारामारी, सरकारी की भी हालत अच्छी नहीं

नई दिल्ली: कोरोना के इलाज के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में एक दिन का खर्च जहां 1 लाख रुपए तक है, वहीं सरकारी अस्पताल में एक दिन भी काटना मुश्किल है.

कोरोना संकट के बीच दिल्ली के अस्पतालों की हालत‌ खराब है. ऐसे में आपके पास एक ही विकल्प है,  हिम्मत से काम लें.

कोरोना काल में देश की राजधानी की हालत खराब है. दिल्ली के सभी 6 प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना बेड्स की मारामारी शुरू हो चुकी है.

गंगाराम में सबसे ज्यादा 164 बेड, मैक्स साकेत में 160 बेड, अपोलो सरिता विहार में 80 बेड हैं. ये सभी अस्पताल लगभग पूरी तरह से भर चुके हैं। बाकी बचे 4 प्राइवेट अस्पतालों का भी हाल बुरा है। 
बेड्स खत्म होने की सूरत में वेटिंग लिस्ट बना दी गई है, मतलब बेड खाली होने पर ही बारी आएगी.

ये हालात तब हैं, जब प्राइवेट अस्पताल में एक दिन का खर्च नॉर्मल वॉर्ड में 25 से 30 हजार रोजाना से लेकर ICU में 1 लाख रोजाना तक का है.

वहीं दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बेड तो हैं लेकिन व्यवस्था छुट्टी पर है. पहले भर्ती करने में आनाकानी, फिर भर्ती करने के बाद सिस्टम फेल.
 
देश के सबसे बड़े सरकारी कोविड-अस्पताल के एलएनजेपी के बाहर भी लोग लाचार नजर आ रहे हैं.

एक महिला तो 3 दिन तक अपने पति को ही ढूंढती रही कि किस वार्ड में भर्ती हैं. कोरोना की वजह से तीमारदार अंदर जा नहीं सकते और हालात पता नहीं कर सकते इसलिए ज्यादा परेशान हैं.

दिल्ली का लोक नायक अस्पताल 2000 बेड्स वाला देश का सबसे बड़ा अस्पताल है. अभी यहां 600 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं. लेकिन हर किसी को सरकारी अस्पताल में भर्ती कर ही लिया जाए, ये जरूरी नहीं. भर्ती कर भी लिया जाए तो शिकायतें बहुत हैं.

दिल्ली के प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की हालत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि स्थिति क्या है. आप जितना डरेंगे उतनी मुश्किल होगी. इसलिए कम से कम मनोवैज्ञानिक लड़ाई लड़ें और बीमारी से लड़ने में अपनी शारीरिक ताकत यानी इम्युनिटी और मानसिक बल बनाए रखें.

हालांकि अच्छी बात ये है कि ज्यादातर लोग ठीक हो रहे हैं. देश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल लोक नायक अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार से हमने बात की तो उन्होंने इतना भरोसा दिलाया कि बेड्स की कोई कमी नहीं है.

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