दिल्ली के अंदर केस बढ़ने से न हों चिंतित, लॉकडाउन की छूट से न घबराएं: केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोरोना से लड़ने के लिए दिल्ली के तैयारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोगों ने बढ़ते कोरोना के मामलों से चिंतित न होने की अपील की है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि राजधानी में लॉकडाउन से जो छूट मिल रही है उससे घबराइए मत।उन्होंने ये जरूर कहा कि मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो यह चिंता का विषय होगा लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आगे उन्होंने संक्रमितों के लिए बेड के इंतजाम से लेकर वेंटिलेटर तक का क्या इंतजाम है इसके बारे में बताया।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माना कि लॉकडाउन खुलने के बाद से कोरोना के मामले थोड़े बढ़े हैं, लेकिन ठीक होकर घर जाने वालों की संख्या भी बढ़ी है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में हालत नियंत्रण में है और अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड, आक्सीजन सिलेंडर व वेंटिलेटर मौजूद हैं, किसी को घबराने की जरूरत नहीं है।

बेड्स का आंकड़ा भी दिया
केजरीवाल ने कहा कि, कल तक 13418 केस थे, 6540 ठीक हो गए और 6617 अभी बीमार हैं। वहीं 261 की मौत हो चुकी है। दिल्ली के अस्पतालों की हालत बताते हुए उन्होंने कहा कि अभी राजधानी के अस्पतालों में 3829 बेड हैं, 3164 बेड पर ऑक्सीजन उपलब्ध है। ऑक्सीजन की बात इस लिए बता रहा हूं क्योंकि कोरोना का कोई उपचार नहीं है। 1478 बेड पर मरीज हैं, 2500 बेड अभी खाली हैं।

निजी अस्पतालों को भी तैयार रहने को बोला
केजरीवाल ने बताया है कि निजी अस्पतालों को भी कोरोना के बेड तैयार करने के लिए बोला गया है। इससे 2000 बेड और उपलब्ध हो जाएंगे। 

अब बिना लक्षण वाले केस आ रहे हैं
केजरीवाल ने बताया कि अब ऐसे केस आ रहे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं है। आज 3314 लोगों का घर पर इलाज चल रहा है, लगभग 2000 लोगों का अस्पतालों में इलाज होगा। जीटीबी अस्पताल में 1500 बेड कोरोना के लिए तैयार किए जा रहे हैं। कल 2000 बेड का ऑर्डर भी दिया गया है। 

एक हफ्ते ढील के बाद बढ़े 3500 मरीज
केजरीवाल ने बताया कि एक हफ्ते में ढील देने के बाद शहर में 3500 मरीज बढ़ गए हैं और ढाई हजार ठीक हो गए हैं।

एक निजी अस्पताल की हालत भी बताई
एक निजी अस्पताल की लापरवाही के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री बोले, एक निजी अस्पताल में एक मरीज को सांस की तकलीफ हो रही थी, उसको कोरोना निकला, निजी अस्पताल ने  इलाज करने से मना कर दिया। हमने अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि आखिर उनका लाइसेंस रद्द क्यों न किया जाए ?”

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