जम्मू-कश्मीर: ‘चेरी’ पर कोरोना का असर, बेचने के लिए बाजार नहीं, अब सड़ने लगी है फसल

श्रीनगर: पेड़ों पर चेरी पूरी तरह तैयार है, मगर बेचने के लिए बाजार नहीं हैं. अब इनकी खरीद न होने से करोड़ों के नुकसान का अंदेशा लगाया जा रहा है. कोरोना वायरस ने कश्मीर में 11,000 मीट्रिक टन चेरी की फसल पर प्रभाव डाला है.

हाल के वर्षों में अच्छी फसल के बाद, इस मौसम में कोरोना महामारी को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन के कारण कश्मीर में चेरी उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

कश्मीर में साल की पहली फल फसल, कटाई के लिए तैयार है, लेकिन पिछले साल सेब की फसल की तरह ही चेरी फसल को भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. चेरी का उत्पादन 10 मई से जून के अंत तक होता है और घाटी में किसानों के लिए यह पहली फसल होती है.

चेरी की मांग ज्यादातर जम्मू-कश्मीर के बाहर से आती है. लगभग 90% चेरी कश्मीर से देश और विदेश के कई हिस्सों में बेची जाती है, लेकिन इस बार कश्मीर के चेरी के लिए कोई बाजार नहीं है. वहीं इस फल की सेल्फ लाइफ बहुत कम है और अब यह फसल सड़ने लगी है. किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और कई लोग फलों की पैकिंग भी नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कोई उम्मीद नहीं है कि उन्हें इसके लिए कोई बाजार मिलेगा.

चेरी किसान मोहम्मद इक़बाल कहते हैं, ‘हम उतारते नहीं हैं क्योंकि आगे बाजार नहीं, बाजार होता तो हम ले जाता. लॉकडाउन की वजह से मंडियां बंध हैं. चेरी उतर के क्या फायदा इस में भी पैसा लगता है कोई फायदा नहीं है. हमारा कम से काम 7 से 8 लाख का का नुकसान हुआ और अगर पूरे कश्मीर की बात करें तो लगभग 10 करोड़ का नुकसान हुआ है.’

गर्मी के मौसम में कुछ घंटों के लिए चेरी से भरे वाहन को रोकने से फल खराब हो जाता है और कश्मीर में फल प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी के कारण इस मौसम में फसल खराब होने की आशंका है.

पिछले वर्षों में चेरी के मौसम में पांच से छह ट्रक रोजाना देश के विभिन बाजारों, विशेषकर मुंबई और खाड़ी के देशों में भेजे जाते थे, जहां चेरी की अच्छी मांग रहती है. यहां तक ​​कि कुछ प्रथम श्रेणी की चेरी को देश भर के पांच सितारा होटलों के लिए चुना जाता था. लेकिन इस बार किसानों को कोई उम्मीद नहीं है.

कश्मीर में चेरी की खेती के तहत 2700 हेक्टेयर से अधिक भूमि है, जिस पर लगभग 11000 मेट्रिक टोन के करीब चेरी उगती है, देश के चेरी उत्पादन में कश्मीर चेरी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. उत्तरी कश्मीर के तांगमर्ग और लार के अलावा, श्रीनगर सहित चेरी दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिलों के कुछ हिस्सों में भी उगाई जाती है.

बागवानी विशेषज्ञ ने कहा कि चेरी की फसल को उगने के लिए कश्मीर में पर्याप्त मशीनरी है, लेकिन इस बार कोई बाजार उपलब्ध नहीं है, क्योंकि कोरोना वायरस को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन का चेरी पर बुरा प्रभाव पड़ता दिख रहा है और इससे चेरी के किसानों को भारी नुकसान होगा.

कश्मीर में चेरी किसान, जो करोड़ों में नुकसान सह रहे हैं, आशा करते हैं और चाहते हैं कि सरकार उनके बचाव के लिए आगे आए और उन्हें कुछ मदद करे.

[source_ZEE NEWS]
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