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कोविड-19 : देश में पहली बार एक दिन में 6,000 से ज्यादा मामले, कुल केस 1.22 लाख

नई दिल्‍ली: देश में पहली बार एक दिन में कोरोना वायरस से संक्रमण के 6,000 से ज्यादा मामले आने के साथ ही अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या शुक्रवार को करीब 1.22 लाख पहुंच गई. वहीं सरकार का कहना है कि वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन अत्यंत प्रभावी रहा है और यदि ऐसा नहीं किया गया होता तो अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या 30 लाख तक पहुंच गई होती.

हालांकि, इस बीच आरबीआई का कहना है कि शुरुआती दिनों में कोविड-19 महामारी के कारण अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान का जो आकलन किया गया था उसके मुकाबले इसका प्रभाव बहुत व्यापक और गंभीर हुआ है. गौरतलब है कि चीन में दिसंबर में कोविड-19 का पहला मामले आने के बाद से दुनिया भर में 51.3 लाख लोग इस जानलेवा वायरस से संक्रमित हुए हैं जबकि करीब 3.3 लाख लोग की संक्रमण से मौत हुई है.

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36-70 लाख लोग संक्रमण से बचे
विभिन्न अध्ययनों और अनुसंधानों का हवाला देते हुए सरकारी अधिकारियों का भी कहना है कि कोविड-19 महामारी उन्मूलन के लिए यदि ‘‘समय पर, चरणबद्ध तरीके से, अग्रसक्रिय और पहले से स्थिति भांप कर सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी उपाय’’ के रूप में लॉकडाउन लागू नहीं किया गया होता तो भारत में करीब 2.1 लाख लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हो गई होती.

देश में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से ही राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू है. इसका चौथा चरण 18 मई से शुरू हुआ है और 31 मई तक जारी रहेगा, हालांकि इस चरण में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकारों (केन्द्र और राज्य) ने काफी रियायतें दी हैं.

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ना सिर्फ आर्थिक गतिविधियों को रियायत दी गई है बल्कि चरणबद्ध तरीके से सोमवार, 25 मई से घरेलू उड़ानों को भी छूट दे दी गई है. इन सबके बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि बृहद आर्थिक परिस्थितियों पर कोविड-19 का जो प्रभाव पड़ा है वह पहले किए गए आकलन की तुलना में बहुत गंभीर है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की हालत बहुत खराब है.

केन्द्रीय बैंक ने यह भी कहा कि आर्थिक और वित्तीय गतिविधियां ही बर्बाद नहीं हुई हैं, जीविका और स्वास्थ्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है. कई विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन जारी रहा तो उसके कारण आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था में गंभीर सुस्ती का दौर आएगा. गौरतलब है कि 25 मार्च को महज 21 दिन के लिए लागू हुआ लॉकडाउन तीन बार बढ़ाया जा चुका है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकाररियों और कोविड-19 कार्य बल के सदस्यों ने हालांकि कई अध्ययनों और अनुसंधानों का संदर्भ देकर अपना तर्क मजबूत किया है कि महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाया गया लॉकडाउन बहुत प्रभावी रहा है.

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) और एक महत्वपूर्ण उच्चाधिकार प्राप्त समूह के अध्यक्ष डॉक्टर वी. के. पॉल ने कोविड-19 हालात पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत में समय पर, चरणबद्ध तरीके से, अग्रसक्रिय और पहले से स्थिति भांप कर सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी उपाय के रूप में लॉकडाउन को लागू किया गया और यह सरकार की व्यापक नीति और रणनीति का हिस्सा था. उन्होंने कहा कि संक्रमित लोगों की संख्या के तरह ही कोविड-19 से होने वाली मौतें भी लॉकडाउन के कारण कम हुई है.

इसी दौरान सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय मे सचिव प्रवीण श्रीवास्तव ने कोविड-19 के मामलों और उससे होने वाली मौतों का एक मॉडल आधारित अनुमान/आकलन प्रस्तुत किया, जिनसे लॉकडाउन के कारण बचाव हुआ है. बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के एक मॉडल के आधार पर उन्होंने बताया कि लॉकडाउन ने 1.2 से 2.1 लाख लोगों की जान बचाई है वहीं 36 से 70 लाख लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने से भी बचाया है.

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श्रीवास्तव ने कहा कि पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मॉडल के अनुसार, लॉकडाउन के कारण करीब 78,000 लोगों की जान बची है. उन्होंने दो और स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों के मॉडल का हवाला देते हुए बताया कि लॉकडाउन ने करीब 23 लाख लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने और करीब 68,000 लोगों को संक्रमण से मरने से बचाया है.

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘हमें पूर्ण विश्वास है कि जनता के पूर्ण सहयोग से लॉकडाउन का बहुत अच्छा प्रभाव हुआ है.’’

स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अभी तक कोविड-19 के 48 हजार 534 व्यक्ति संक्रमण मुक्त हो चुके हैं जो कुल मामलों का करीब 41 फीसदी है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे में 3234 रोगी उपचार के बाद संक्रमण मुक्त हुए हैं. अग्रवाल ने बताया कि कोविड-19 के कारण मृत्यु दर 19 मई को 3.13 फीसदी से कम होकर 3.02 फीसदी हो गई है क्योंकि अब ध्यान इसे रोके जाने के उपायों और मामलों के क्लीनिक प्रबंधन पर है.

(इनपुट: एजेंसी भाषा)

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