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कोरोना संकट के बीच बीमार लोगों की इस तरह मदद कर रहा ये शख्स, हजारों लोगों का इलाज करवाया

अस्मिता यादवमुंबई: कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में जहां एक तरफ पुलिस, डॉक्टर, सफाई कर्मचारी डटकर खड़े है तो दूसरी तरफ समाज के भी कुछ लोग हैं जो कोरोना के खिलाफ जंग में आगे हैं. ऐसे ही एक योद्धा की कहनी हम आपको बताने जा रहे हैं है. ये हैं मुंबई के मीरा-भायंदर इलाके के एक्टिविस्ट सादिक पाशा. सादिक बीमार लोगों को ऑटो रिक्शा से अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं. ऐसे वक्त में जब बीमारी का नाम सुनकर ही रिश्तेदार और दूसरे लोग हाथ खड़ा कर ले रहे हैं, लोगो को ये सुविधा  देना बहुत बड़ी सेवा है.

मीरा रोड इलाके के एक्टिविस्ट सादिक पाशा लॉकडाउन के दौरान गरीबों के लिए खाने का सामान  बांटने के काम मे लगे थे, उसी दैरान उनसे कई लोगों ने मरीजों को गाड़ियां नहीं मिलने के बारे बताया. पहले तो सादिक ज्यादा से ज्यादा लोगों को खाने के सामान पहुंचाने में लगे रहे लेकिन जब कई लोगों ने उनसे बीमार लोगों को हो रही परेशानी के बारे में बात की तो उन्होंने बीमार लोगों की मदद करने का फैसला किया.

सबसे पहले सादिक ने लोगों के लिए एक ऑटो रिक्शा  की व्यवस्था की जो बीमार लोगों को ईलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाता है और जब तक उनका इलाज हो नहीं जाता वो वही खड़ा रहता, और फिर उन्हें लेकर आता है.

पहले कुछ दिनो तक ऑटो रिक्शा  का इस्तेमाल करते रहे लेकिन जब ज्यादा ऐसे मामले सामने आने लगे तो उन्होंने अपने दोस्तों को इस मुहिम में शामिल कर लिया और उनकी गाड़ी से भी लोगों को पहुंचाने लगे.

सादिक पाशा ने अपने संपर्क नंबर के साथ एक छोटी सी वीडियो क्लिप बनाई और उसे सोशल मीडिया साइट्स पर पोस्ट कर दिया, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को मदद मिल सके. अगले कुछ दिनों में, उन्हें लोगों से बड़ी संख्या में अनुरोध मिले.

 सादिक कहते हैं, ‘मैंने महसूस किया कि बहुत सारे लोग ऐसे थे जिनके पास लॉकडाउन के कारण यात्रा करने का कोई साधन नहीं था, जिन मरीजों के पास वाहन नहीं है, उन्हें अस्पताल पहुंचने में बहुत मुश्किल होती है. और लोग साधन की तलाश में दूर तक नहीं चल सकते इसलिए हमने ऐसे लोगों की मदद करना शुरू कर दिया, हमारे पास अब चार वाहन हैं, जो लोग सेवा का लाभ उठाना चाहते हैं उन्हे डीटेल्स जैसे डॉक्टर के साथ उनकी अपॉइंटमेंट का समय और तारीख बतानी होती है. इसके जरिए  सुनिश्चित किया जाता है कि सामने वाले को सच में मदद की जरूरत है या नहीं. फिर, मरीजों को अस्पताल ले जाया जाता है और इलाज होने के बाद उन्हें घर छोड़ा जाता है.’

सादिक पाशा का कहना है कि उन्हें अपने इस काम खुशी मिलती है और लोगों का इलाज हो जाता है इससे ज्यादा उन्हें कुछ और नहीं चाहिए.

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