कोरोना महामारी के बीच ये लिपि सीख रहे लोग, इंट्रेस्टिंग है इसके पीछे की कहानी

औरंगाबाद: कोविड-19 (Covid-19) महामारी फैलने के बीच महाराष्ट्र (Maharashtra) के औरंगाबाद (Aurangabad) में विभिन्न क्षेत्रों के कई लोग ‘मोडी लिपि’ सीखने के लिए जुटे हैं. मराठी में लेखन के लिए पहले इसी लिपि का उपयोग किया जाता था.

मराठी में कई ऐतिहासिक दस्तावेजों के अलावा ऐतिहासिक स्थलों पर पाए गए अभिलेख मोडी लिपि में हैं.

औरंगाबाद में रहने वाले मोडी लिपि के एक विशेषज्ञ डॉ कामजी दाख ने इसे सीखने को उत्साहित लोगों की मदद के लिए एक महीने पहले एक सोशल मीडिया समूह बनाया था.

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उन्होंने औरंगाबाद में राज्य पुरातत्व विभाग के साथ समन्वयक के रूप में काम किया है.

उन्होंने कहा, ‘यादव राजवंश के दौरान प्रचलन में आई मोडी लिपि का उपयोग देश की आजादी के बाद के समय तक किया जाता रहा.’

उन्होंने कहा, ‘इस लिपि का उपयोग मराठा काल में अधिक हुआ, लेकिन 1960 के दशक के बाद इसका उपयोग कम होने लगा क्योंकि इसकी छपाई कठिन है.’

उन्होंने कहा कि इसे सीखने के लिए बनाए गए सोशल मीडिया समूह में 46 सदस्य हैं.

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