कोरोना मरीजों के लिए बेड रिजर्व रखना प्राइवेट अस्पतालों को मुश्किल क्यों लग रहा है?

 नई दिल्ली: दिल्ली में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों से कोरोना मरीजों के लिए बेड रिजर्व करने को कहा है. 50 बिस्तर या उससे ज्यादा वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम को 20% बेड रिजर्व रखने होंगे. इस फैसले का कई प्राइवेट अस्पताल विरोध कर रहे हैं और इस विरोध के कुछ जायज तर्क भी हैं.

हमने ऐसे अस्पतालों का जायजा भी लिया और अस्पताल के मैनेजमेंट से बात करके यह समझने की कोशिश भी की कि आखिर जरूरत के वक्त में कोरोना मरीजों के लिए बेड रिजर्व रखना क्यों एक मुश्किल काम लग रहा है.

दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़े तो सबसे पहले प्राइवेट अस्पतालों के बिस्तर खत्म होने लगे. इस बीच 50 बिस्तरों से ज्यादा वाले अस्पतालों से 20% बेड कोरोना के लिए आरक्षित रखने को कहा गया लेकिन ऐसे छोटे अस्पताल चलाने वाले डॉक्टरों का मानना है कि यह फैसला दिल्ली में कोरोना के मामले और ज्यादा बढ़ा देगा और स्थिति हाथ से निकल जाएगी. 

हमने दिल्ली में बने ऐसे छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम का जायजा लिया तो पाया कि कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों  को अस्पताल में भर्ती करना घाटे का सौदा हो सकता है.

कई नर्सिंग होम में आने और जाने के रास्ते बेहद छोटे हैं कई नर्सिंग होम में कोरोना और नॉन कोरोना मरीजों के लिए अलग-अलग वेंटिलेटर की सुविधा मुहैया कराना संभव नहीं है. ऐसे में अस्पताल में आने वाले दूसरे मरीजों में भी संक्रमण फैलने का खतरा है. दूसरी बीमारियों के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों ने भी कोरोना होने का डर जताया.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन और नर्सिंग होम फोरम ने दिल्ली सरकार को सुझाव दिया कि पहले से कोरोना का इलाज कर रहे अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाए जाने चाहिए या फिर कुछ अस्पतालों को पूरी तरह से कोविड में बदल दिया जाना चाहिए. एक ही अस्पताल में कोरोना और नॉन कोरोना मरीजों का इलाज करने से स्थिति खराब हो सकती है.

लेकिन सरकार फिलहाल सुनने के मूड में नजर नहीं आती. प्राथमिकता है किसी भी तरह से बिस्तरों की संख्या बढ़ा देना. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दे दी कि जल्दी ही दिल्ली में बेड की तादाद बढ़ जाएगी. सरकार के मुताबिक 6600 बेड का इंतजाम हो गया है. प्राइवेट बेड- 677 से बढ़ाकर 2677 बेड कर दिए हैं. 5 जून तक प्राइवेट में 3677 बेड हो जाएंगे.

हालांकि दिल्ली के 117 प्राइवेट अस्पतालों ने दिल्ली सरकार को कोरोना मरीजों के लिए बिस्तर आरक्षित करने की हामी भर दी है. इन 117 अस्पतालों में कुल 15862 बिस्तर है जिनमें से 20% के हिसाब से सरकार ने 3172 बेड्स मरीजों के लिए गिन लिए हैं.

लेकिन हमें सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली कि कई अस्पतालों ने यह फैसला सरकार के दबाव की वजह से लिया है.

दिल्ली में  कुछ होटलों को भी अस्पतालों के साथ जोड़ा गया है लेकिन दिल्ली में ऐसे 4 होटलों से हमने बात की तो उन्होंने कहा कि अभी कोरोना वायरस मरीजों के लिए व्यवस्था तैयार करने में हमें कुछ दिन लग सकते हैं.

दिल्ली में फिलहाल 17,386 में 2100 मरीज़ अस्पताल में हैं, बाकी घरों में, क्वारन्टीन सेंटर में हैं. ऐसे में जरूरत कागजों पर बिस्तर बढ़ाने की नहीं असल में वेंटिलेटर वाले बेड बढ़ाने की है सवाल यह भी है कि जब प्राइवेट अस्पताल भर चुके हैं तो सरकार को यह सोचना चाहिए कि इतनी मारामारी में भी मरीज दिल्ली में खाली पड़े सरकारी अस्पतालों में क्यों नहीं जाना चाहता. क्यों कोई मरीज 20000 से लेकर 100000 रुपए रोजाना देकर प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने में ही अपनी भलाई समझ रहा है.

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