कोरोना इस तरह बदल देगा आपके जीने का तरीका, सामने आई ये बात

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण का दौर हमारी जिंदगी और उसके तौर तरीके को बदलने जा रहा है. वायरस के डर से कांपती दुनिया में भारत कहीं पीछे नहीं है. वायरस का संक्रमण हर बीतते दिन के साथ तेजी से फैल रहा है. लेकिन संक्रमण के बावजूद ज्यादा समय तक लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं रहनेवाली है. लॉकडाउन में लगातार रियायत देकर जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं. इन कोशिशों में यह बात लगातार दोहराई जा रही है कि अब लोगों को कोरोना बीमारी के साथ ही बचाव के जरिए जीने की आदत डालनी होगी. आनेवाले समय में यह न्यू नॉर्मल है. इसी न्यू नॉर्मल में देश के अलग अलग शहरों में सबसे बड़ा बदलाव अब यातयात में दिखने वाला है. लोग अपनी सुरक्षा और संक्रमण के बचाव को लेकर ज्यादा अलर्ट हैं जिससे लॉकडाउन पूरी तरह खुलने के बाद भी लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी बना सकते हैं.

13 फीसदी लोग मेट्रो में यात्रा से किनारा कर लेंगे
कोविड-19 का सीधा असर देशभर के बड़े शहरों के पब्लिक ट्रांसोपर्ट सिस्टम पर दिखाई देगा. ट्रेन, हवाई, बस यहां तक कि ऑटो, टैक्सी में यात्रा करते समय भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए इसको लेकर सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है. बावजूद इसके देश के शहरों में रहनेवाले 35 फीसदी लोग ऑफिस जाने के लिए अपने पुराने ट्रासंपोर्ट को बदल लेंगे. यह बात टेरी (द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ) द्वारा किए गए ऑनलाइन सर्वे में सामने आई है. यह सर्वे 51 शहरों में किया गया. जिसमें 35 फीसदी लोगों ने कोरोना की वजह से अपने ऑफिस जाने के ट्रांसपोर्ट तरीके को बदल देंगे वहीं 23 फीसदी लोग अपनी पर्सनल कार का इस्तेमाल करेंगे. मेट्रो और बस जैसे यातायात के माध्यमों से लोग बचेंगे और  इसकी जगह प्राईवेट ट्रासंपोर्ट या ऑटो, टैक्सी जैसे ट्रांसपोर्ट सिस्टम ले सकते हैं. वहीं दिल्ली-एनसीआर में 13 फीसदी लोग मेट्रो में यात्रा से किनारा कर लेंगे.

व्यक्तिगत वाहनों के इस्तेमाल में ज्यादा रुचि
दिल्ली-एनसीआर की 16 फीसदी महिला यात्री भी मेट्रो यात्रा को बाय-बाय कर देंगी. इसके अलावा 41 फीसदी लोग पहले बस से जाते थे वो अब किसी और ट्रांसपोर्ट माध्यम का इस्तेमाल करेंगे. बेंगलुरु शहर में महिला यात्रियों के ऑटो, टैक्सी के इस्तेमाल में 12 फीसदी इजाफा देखा जा सकेगा. वहीं कोलकाता में पर्सनल कार को ट्रासंपोर्ट की तरह इस्तेमाल करने में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी. यात्रियों का यह फैसला दिल्ली -NCR समेत देश के अन्य शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. क्यों​​कि सर्वे में ज्यादातर यात्रियों ने लॉकडाउन पीरियड के खत्म होने के बाद अपने व्यक्तिगत वाहनों के इस्तेमाल में ज्यादा रुचि दिखाई है.

नॉन मोटराइज्ड गाड़ियों का प्रमोशन
टेरी के एक्सपर्ट के मुताबिक, सर्वे के डेटा का इस्तेमाल कर सरकार अपनी प्लानिंग कर सकती है. नॉन मोटराइज्ड गाड़ियों को प्रमोट कर प्राइवेट गाड़ियों की संख्या को बढ़ने से रोका जा सकता है. साईकिल पाथवे और पैदल चलने के अच्छे इंतजाम करने होंगे. इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम और वर्किंग आवर को भी बांटने की जरूरत है ताकि लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जोड़े रखने के लिए उनमें सेफ्टी और उपलब्धता को आसान बनाना होगा. 

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[source_ZEE NEWS]
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