कहीं आपका बच्चा तो नहीं हो रहा ऑनलाइन ‘बदमाशों का शिकार’, ऐसे बचाएं जिंदगी

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग समय के साथ आम होती जा रही रही है और इससे जुड़े मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. गुरुग्राम में एक 16 साल के लड़के का छत से कूदकर आत्महत्या करना हो या  फिर ‘bois लॉकर रूम’ जैसे ताजे मामले. हमारा ध्यान एक बार फिर इस समस्या की ओर गया है कि सोशल मीडिया टीनएजर्स को क्या सही राह दिखा रहा है.

आज के समय में इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को आसान तो बना दिया है लेकिन सोशल मीडिया की दखलअंदाजी से मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. सोशल मीडिया ने तो कई लोगों की जिंदगियां तबाह कर दी हैं. खासतौर पर स्कूली बच्चे और युवा वर्ग इंटरनेट हस्तक्षेप से सबसे ज्यादा परेशान है. साइबर बुलिंग इसका एक बड़ा उदाहरण और हथियार है. 

क्या है साइबर बुलिंग?
जब सोशल मीडिया पर इंसान पर व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं, जिनसे वह बुरा अनुभव करता है. ट्रोलिंग और साइबर बुलिंग को अक्सर लोग एक मान लेते हैं, पर शायद युवाओ, बच्चो में इसको समझना मुश्किल हो जाता है. ट्रोल किसी का मजाक बनाने को कहा जाता है लेकिन इसको एक मजाक तक ही सीमित रखा जाता है. यही मजाक जब बच्चे इंटरनेट पर देखते हैं तो उनके दिमाग में घर कर जाती है और उससे उन्हें फर्क पड़ने लगता है जो साइबर बुलिंग में बदल जाती है. साइबर बुलिंग यानी गंदी भाषा, तस्वीरों या धमकियों से इंटरनेट पर तंग करना साइबर बुलिंग और साइबर हैरसमेंट को ऑनलाइन बदमाशी के रूप में भी जाना जाता है. 

आजकल सोशल मीडिया पर व्यवहार में अफवाह, धमकी, यौन टिप्पणी, पीड़ितों की व्यक्तिगत जानकारी या पीजोरेटिव लेबल शामिल होना साइबर बुलिंग का हिस्सा है. यह तेजी से आम होता जा रहा  है. विशेष रूप से टीनएजर्स के बीच. आजकल कोई भी बच्चा या तो इसको बढ़ावा दे रहा होता या इसका शिकार हो रहा होता है. बुलिंग तब होती है जब कोई व्यक्ति, आमतौर पर किशोर, धमकाने या इंटरनेट पर दूसरों को परेशान करता है, खासकर सोशल मीडिया साइटों पर. 

रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर बुलिंग का शिकार हुए बच्चों में दूसरों के मुकाबले मानसिक आघात और डिप्रेशन का खतरा ज्यादा गंभीर होता है और  साइबर बुलिंग बच्चों में स्ट्रेस डिसॉर्डर को बढ़ावा देता है. जर्नल ऑफ क्लीनिकल साइकेट्री में प्रकाशित शोध के नतीजों में इसके सह-लेखक और मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन के फिलिप डी हार्वे ने भी बताया कि मानसिक समस्याओं की पृष्ठभूमि वाले बच्चों में भी साइबर बुलिंग के दुष्प्रभाव साफ दिखते हैं. 

ब्रिटिश संस्था “एंटी बुलिंग अलायंस” के सर्वे के मुताबिक आधे से ज्यादा बच्चे और नौजवान हर रोज इसका शिकार बन रहे हैं और इस बच्चो को बचाना बेहद जरूरी है. 

साइबर बुलिंग से अपने बच्चों को बचाएं 
बुलिंग से बचना बहुत आसान नहीं है लेकिन अगर आप समझदारी से काम लो तो आप बहुत आसानी से साइबर बुलिंग से बचा सकते हैं. भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अनुसार कोई व्यक्ति या उसके धर्म के बारे में अभद्र टिप्पणी या उसको आहत करने वाली भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता. जब भी आप ऐसी कोई भाषा या हरकत का सामना करें तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें. फेसबुक पर भी उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं. 

बच्चो को भी बताएं कि क्या क्या करना है:
1. जब भी आपके साथ फेसबुक या किसी भी सोशल मीडिया साइट पर कोई व्यक्ति गलत व्यवहार करें तो उसे इग्नोर कर दें. यह सबसे अच्छा तरीका है साइबर बुलिंग से बचने का. अगर आप सामने वाले व्यक्ति को उसकी बात का जवाब देंगे तो वह फिर और बात करेगा. अगर आप उसे नजरअंदाज करोगे तो वह एक समय के बाद खुद ही थक हार कर बैठ जाएगा. 

2. आप फेसबुक पर ऐसी कोई टिप्पणी, पोस्ट, फोटो या वीडियो देखें जिसमें किसी को या आपको ट्रोल किया गया हो तो आप फेसबुक को उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं. फेसबुक पर हर पोस्ट में 3 पॉइंट मेनू पर क्लिक करके Abuse ऑप्शन सेलेक्ट करके उसकी रिपोर्ट की जा सकती है. फेसबुक टीम उस कंटेंट या व्यक्ति विशेष के अकाउंट को सस्पेंड कर देगा।ऐसा ही आप बाकी सोशल मीडिया साइट टि्वटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप पर कर सकते हैं. 

3. लीगल एक्शन ले
अगर कोई व्यक्ति इंटरनेट पर आपके साथ बदतमीजी करता है तो आप उसके खिलाफ लीगल एक्शन ले सकते हैं. इसके लिए आप उसके मैसेज, फोटो या वीडियो जो भी उसने आपके साथ सही किया हो को सुरक्षित रख लें और नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं. 


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