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एम्स अस्पताल के एक कर्मचारी की मौत, कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका से मचा हड़कंप

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एम्स अस्पताल की कैंटीन में काम करने वाले एक कर्मचारी की गुरुवार शाम मौत हो गई। उसे एक दिन पहले से बुखार हो रहा था। दूसरे दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अस्पताल प्रशासन ने अभी उसके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं की है। कर्मचारी का सैंपल टेस्ट के लिए भेजा जा चुका है।

लेकिन अगर कर्मचारी का सैंपल टेस्ट पॉजिटिव पाया जाता है तो एम्स के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है क्योंकि कर्मचारी अस्पताल की कैंटीन में लगातार भोजन बनाने का काम कर रहा था।

इस कैंटीन में अस्पताल के भारी संख्या में डॉक्टर और नर्स भोजन किया करते थे। इस मामले पर तमाम प्रयासों के बावजूद अस्पताल का आधिकारिक पक्ष नहीं मिल सका है।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के डॉक्टर आर श्रीनिवास ने अमर उजाला को बताया कि इस कैंटीन में एमबीबीएस छात्र, सीनियर डॉक्टर और नर्सें भोजन करती हैं।

अगर कर्मचारी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हो जाती है तो मेस में काम करने वाले सभी कर्मचारियों और यहां भोजन करने वाले सभी डॉक्टर-नर्सों का कोरोना पॉजिटिव टेस्ट कराना आवश्यक हो जाएगा।

वहीं, एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनके लगातार अनुरोध करने के बाद भी हॉस्टलों में सैनिटाइजर, मास्क और थर्मल स्क्रीनिंग की मशीनें नहीं रखी गई हैं। लापरवाही का यह आलम तब है कि जब इन डॉक्टरों की ड्यूटी कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए भी लगाई जाती है।

चिकित्सकों का कहना है कि अगर इस घटना में मृत कर्मचारी को उचित मुआवजा नहीं दिया जाता है, और उनके हॉस्टलों में थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं की जाती है, तो वे हड़ताल पर भी जा सकते हैं।

अस्पताल में चार हजार से अधिक सीनियर-जूनियर डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र काम करते हैं।

 

सार

  • कर्मचारी कैंटीन में भोजन बनाता था, भारी संख्या में डॉ़क्टर-नर्स इसी मेस में करते थे भोजन
  • अस्पताल में चार हजार से अधिक सीनियर-जूनियर डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र काम करते हैं।

विस्तार

एम्स अस्पताल की कैंटीन में काम करने वाले एक कर्मचारी की गुरुवार शाम मौत हो गई। उसे एक दिन पहले से बुखार हो रहा था। दूसरे दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अस्पताल प्रशासन ने अभी उसके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि नहीं की है। कर्मचारी का सैंपल टेस्ट के लिए भेजा जा चुका है।

लेकिन अगर कर्मचारी का सैंपल टेस्ट पॉजिटिव पाया जाता है तो एम्स के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है क्योंकि कर्मचारी अस्पताल की कैंटीन में लगातार भोजन बनाने का काम कर रहा था।

इस कैंटीन में अस्पताल के भारी संख्या में डॉक्टर और नर्स भोजन किया करते थे। इस मामले पर तमाम प्रयासों के बावजूद अस्पताल का आधिकारिक पक्ष नहीं मिल सका है।ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के डॉक्टर आर श्रीनिवास ने अमर उजाला को बताया कि इस कैंटीन में एमबीबीएस छात्र, सीनियर डॉक्टर और नर्सें भोजन करती हैं।

अगर कर्मचारी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हो जाती है तो मेस में काम करने वाले सभी कर्मचारियों और यहां भोजन करने वाले सभी डॉक्टर-नर्सों का कोरोना पॉजिटिव टेस्ट कराना आवश्यक हो जाएगा।

वहीं, एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनके लगातार अनुरोध करने के बाद भी हॉस्टलों में सैनिटाइजर, मास्क और थर्मल स्क्रीनिंग की मशीनें नहीं रखी गई हैं। लापरवाही का यह आलम तब है कि जब इन डॉक्टरों की ड्यूटी कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए भी लगाई जाती है।

चिकित्सकों का कहना है कि अगर इस घटना में मृत कर्मचारी को उचित मुआवजा नहीं दिया जाता है, और उनके हॉस्टलों में थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं की जाती है, तो वे हड़ताल पर भी जा सकते हैं।

अस्पताल में चार हजार से अधिक सीनियर-जूनियर डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र काम करते हैं।

 

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