इंटरनेट ठप होने से नहीं बन सकी आईडी, नशा छोड़ने को आए लोग दवा न मिलने पर गुस्साए

  • नशा छोड़ने आने वालों की संख्या रोज 25 से बढ़कर 90 तक पहुंची
  • सुबह 7 बजे से बैठे थे, दोपहर 12 बजे पता चला नए मरीजाें काे दवा नहीं दे रहे

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 07:21 AM IST

बठिंडा. इंटरनेट ठप होने से आईडी नहीं बन सकी तो नशा छोड़ने की दवा लेने आए मरीजों ने गुस्सा जताया। कोरोना वायरस से बचाव को लेकर जारी कर्फ्यू के बीच सिविल अस्पताल में बने नशा मुक्ति केंद्र व ओट सेंटर में नशा छोड़ने की दवाई लेने वालों की भीड़ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

हालांकि विभाग की ओर से जारी निर्देशानुसार मरीजों को एक दिन की दवाई की जगह 7 से 15 दिन की दवाई दी जा रही है, बावजूद इसके मरीजों की संख्या घटने की जगह बढ़ती जा रही है। सामान्य दिनों में नशा छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में पहुंचने वाले नए मरीजों की संख्या मात्र से 20 से 25 थी, जोकि अब इनकी संख्या बढ़कर 80 से 90 हो गई है।

तो वहीं जब ओट सेंटर में रोजाना एक दिन दवाई दी जाती थी, तो करीब 300 लोग दवाई लेने पहुंचते थे और अब लॉकडाउन के चलते भी मरीजों की संख्या में कोई ज्यादा कमी नहीं आई है। अब भी ओट सेंटर में दवाई लेने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

वीरवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से दवाई लेने के लिए पहुंचे, मरीजों से पूरा नशा छुड़ाओ केंद्र भरा हुआ था, मरीज लाइन में बैठकर व खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। करीब 12 बजे पता चला कि इंटरनेट बंद है, जिस कारण नए मरीजों की आईडी बनाने में कर्मचारियों को दिक्कत आ रही है। नशा छोड़ने के लिए ओट सेंटर आने वाली भीड़ को संभालने में सेहत विभाग को पसीने छूट रहे हैं। 

सुबह 7 बजे से लाइन लगाकर बैठे मरीज दवाई लेने का इंतजार कर रहे थे, दोपहर 12 पता चला कि अभी तक पुराने मरीजों को ही दवाई दी जा रही है, नए एक भी मरीज को दवाई नहीं दी गई। जिसके बाद मरीज भड़क गए। रामपुरा फूल से आए करतार सिंह, बृजलाल, अशोक कुमार, संगत मंडी से कृष्ण कुमार, हरगोविंद सिंह, कमल शर्मा, राम सिंह, फौजी आदि ने बताया कि महीने में 4 किलो पोस्त खा जाते हैं, लेकिन इन दिनों महंगी मिल रही है, आमदनी का साधन भी नहीं है, जिस कारण छोड़ने का मन बनाया और बुधवार को रामपुरा ओट सेंटर दवाई लेने के लिए गया, परंतु वहां दो घंटे तक बैठने के बाद भी दवाई नहीं मिली। यहां तक 200 से अधिक नए व पुराने मरीज हैं।

कृष्ण कुमार ने कहा कि वह पिछले 2 साल से चिट्टे का सेवन करते हैं, लेकिन पैसों के अभाव में नशा नहीं मिल रहा, पारिवारिक सदस्यों के कहने पर नशा छोड़ने के लिए दवाई लेने सबुह 9 बजे पहुंच गए थे, समस्या को हल करने वाला कोई नहीं।

करतार सिंह ने कहा कि वह महीने में आधा किलो अफीम खा जाते हैं, यहां कर्मचारी मात्र एक गोली ही दे रहे हैं, सुबह आने के लिए कह रहे हैं। 
राजिंदर कुमार वासी कोटशमीर, करनैल सिंह, राजन आदि ने बताया कि  वह पहले अफीम का सेवन कर रहे थे। एक महीने से उन्होंने अफीम का नशा छोड़ दिया है और उनका उपचार यहां से चल रहा है। एक बार की डोज लेने काे चार से पांच घंटे में नंबर आ रहा है। 

Source BHASKAR

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