आशा वर्करों का सिविल सर्जन दफ्तर के समक्ष प्रदर्शन

  • कहा-लोगों की जान बचाने वाले रेगुलर नौकरी के हकदार, मांगें पूरी न होने पर संघर्ष की चेतावनी

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 07:25 AM IST

बठिंडा. पंजाब सरकार ने कोरोना मरीजों का इलाज करने में जुटे सेहत कर्मियों को बिल्कुल बिना हथियारों के बीमारी का सामना करने के लिए छोड़ दिया है। सेहत कर्मचारियों द्वारा बार-बार मांग करने के बावजूद कैप्टन सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा।

यह बात आशा वर्कर और फेसिलिटेटर जिला प्रधान रंजना और सुखविंदर कौर की अगुवाई में वीरवार को सिविल सर्जन बठिंडा कार्यालय के समक्ष रोष प्रदर्शन के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि आशा वर्कर कोरोना के खिलाफ जान जोखिम में डालकर काम कर रही हैं लेकिन सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं किया। जिला प्रधान रंजना आशा वर्कर यूनियन ने कहा कि आशा वर्कर और फेसिलिटेटर कितनी मुश्किलों भरे हालात में काम कर रही हैं और खुद भी इस बीमारी का शिकार हो रही हैं मगर सरकार कुंभकर्णी नींद सोई हुई है।

सरकार की लापरवाही और बेरुखी करके ही आशा वर्कर यूनियन को संघर्ष के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों के प्रति ध्यान नहीं दिया गया तो कार्य बंद कर मुकम्मल बायकाॅट किया जाएगा।

जिला प्रधान रंजना और सुखविंदर कौर ने कहा कि आशा वर्करों और फैसिलिटेटरों को कोरोना में ड्यूटी करने बदले 750 रुपए प्रतिदिन दिए जाएं। ड्यूटी करते कोरोना से इन्फेक्टेड होने वाली वर्करों को मार्च 2021 तक 10 हजार रुपए प्रति महीना स्पेशल भत्ता दिया जाए और जान जाने की सूरत में वर्कर के परिवार को 50 लाख रुपए दिए जाएं।

वर्करों को पीपीई किट्स, मास्क, सेनिटाइजर, दस्ताने दिए जाए। उन्होंने कहा है कि यूनियन की वर्कर व हेल्पर कोरोना वायरस संबंधी हर ड्यूटी को निभाने को तैयार है मगर उन्हें बनती सुविधा मुहैया करवाई जाए।

यूनियन की सदस्याओं को मास्क, सेनिटाइजर, ग्लब्स दिए जाए। बीमे के दायरे में लाया जाए। अन्य कर्मियों की तर्ज पर आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों का मान भत्ता भी बढ़ाया जाए। आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों की मेडिकल स्क्रीनिंग होनी चाहिए।

Source BHASKAR

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