आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कोई भी चीज सीखना चाहते हैं, तो ये पोर्टल बनेगा वन स्टॉप डेस्टिनेशन

नई दिल्ली: अगर आपको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में खासी दिलचस्पी है, आप इसे सीखना चाहते हैं, स्टार्टअप खोलना चाहते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के स्टार्टअप के लिए फंड लेना चाहते हैं. और यह जानना चाहते हैं कि कौन-कौन सी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काम कर रही हैं या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिखाने वाले स्कूल कॉलेज कौन से हैं, तो इसके लिए वन स्टॉप डेस्टिनेशन केंद्र सरकार लेकर आई है.  इसका नाम है www.ai.gov.in.

इस पोर्टल पर आपको वह सब मिलेगा जो आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में जानना चाहते हैं, इस क्षेत्र में होने वाली रिसर्च और डेवलपमेंट रिपोर्ट इस भी होंगी, नए जॉब रोल के बारे में भी इस पर बताया जाएगा.

इस पोर्टल की शुरुआत रिस्पांसिबल एआई फॉर यूथ नाम के प्रोग्राम के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी कम्युनिकेशन कानून और न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने की.

इस प्रोग्राम का मकसद है देश में नयी पीढ़ी को टेक्नोलॉजी  वाला स्किल सिखाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले ही टूल सेट तैयार करके रखना. इसे सरकार का नेशनल e-governance डिविजन देख रहा है. इसमें नैसकॉम और इंटेल इंडिया का सहयोग भी लिया जा रहा है. इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी साथ देगा ताकि देश भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से दक्ष टीचर्स तैयार किए जाएं.

रवि शंकर प्रसाद के मुताबिक यह प्रोग्राम स्किल गैप को भरेगा, इस प्रोग्राम सारे स्कूलों में भी चलाया जाएगा, हम भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में अग्रणी बनाना चाहते हैं. 

हम चाहते हैं इसके इस्तेमाल से इंसान को सुविधा हो उसका विकास हो लेकिन यह भी चाहते हैं कि इंसान की भूमिका आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस के बाद घटना नहीं चाहिए.

वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स आईटी कम्युनिकेशन और मानव संसाधन राज्य मंत्री संजय धोत्रे के मुताबिक-महामारी के दौरान हमने देखा कि किस तरह की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने काम आसान बनाया है. लोगों की जान बचाई है. इसका प्रयोग शिक्षा कृषि स्वास्थ्य ई-कॉमर्स फाइनेंस टेलीकम्युनिकेशन में बहुत अच्छा हो सकता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रोग्राम आठवीं से लेकर 12वीं तक के क्लास के बच्चों के लिए होगा. बच्चों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी. हर एक राज्य से 10 टीचर्स को पहले तैयार किया जाएगा बाद में बच्चों को ट्रेनिंग देंगे. बच्चों को  रुचि के आधार 1 मिनट का वीडियो बनाना होगा उसके बेस पर उनका सेलेक्शन होगा. इलेक्शन के बाद बच्चे बूटकैंप अटेंड करेंगे उसके बाद उनकी एक्टिविटी देखकर उन्हें मेंटर सहायता देंगे। इसके बाद 50 प्रोजेक्ट सेलेक्ट किए जाएंगे, जिनमें से आखिर में 20 को चुना जाएगा, अपने प्रोजेक्ट से संबंधित विशेष काम सौंपा जाएगा.

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