अफसरों को राजस्व की सता रही चिंता, तहसीलदारों को टारगेट देने की तैयारी

  • तहसीलों में रजिस्ट्री करवाने वालों की कम संख्या को देखते हुए बना प्लान
  • लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद आधी रजिस्ट्री भी नहीं हो रही

दैनिक भास्कर

Jun 05, 2020, 08:29 AM IST

चंडीगढ़. पंजाब में लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद सरकार को उम्मीद थी कि उसके सरकारी खजाने में पहले ही तरह पैसा आना शुरू हो जाएगा। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। सरकारी खजाने को भरने में अहम भूमिका निभाने वाला राजस्व विभाग को ही राजस्व को लेकर झटका लग रहा है। सूबे में जहां पहले हर रोज रजिस्ट्री लगवाने वालों की लाइनें लगी होती थी अब सूबे की तहसीलों में उसके आधे लोग भी रजिस्ट्री करवाने नहीं आ रहे है। जिससे विभाग के अधिकारियों को अपने राजस्व की चिंता सताने लगी है।

ऐसे में अब अधिकारी अपने विभाग के टारगेट को पूरा करने के लिए अपने तहसीलदारों को टारगेट देने की तैयारी कर रहे है। रजिस्ट्री के लिए एप्वाइंटमेंट लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। जिससे हर रोज होने वाली रजिस्ट्रियों की संख्या में इजाफा हो सकें। सूबे में स्टांप डयूटी 6 फीसदी है,लेकिन अगर महिला के नाम पर रजिस्ट्री करवाई जाएगा तो 4 फीसदी स्टांप ड्यूटी ही लगती है।

लॉकडाउन में छूट के बाद नाममात्र लोग आ रहे तहसील
बेशक सरकार ने लॉक डाउन में छूट दे दी हो। लेकिन इसके बाद भी तहसीलों में अपने प्लाटों,मकानों और दुकानों की रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों की संख्या नाम मात्र ही है। अभी केवल 10 से 20 लोगों को ही हर रोज रजिस्ट्री करवाने के लिए एप्वाइंटमेंट दी जा रही है। ताकि तहसील में सोशल डिस्टेंस का पालन कराया जा सकें। लेकिन अब विभाग इनकी संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।  जबकि छोटे इलाकों की तहसील में हर रोज 50 से ज्यादा एप्वाइंटमेंट के स्लाट आ रहे है।  

3 चरणों में बढ़ाएगा विभाग रजिस्ट्रियों की संख्या
राजस्व विभाग सूबे में रजिस्ट्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए 3 चरणों में संख्या में इजाफा करेगा। जिसमें तहसीलदारों को रजिस्ट्री का टारगेट दिया जाएगा। छोटी एवं बडी सभी तहसीलों में टोटल एप्वाइंटमेंट लेने वाले लोगों के पहले चरण में 50% लोगों ,दूसरे चरण में 75% लोगों और तीसरे चरण में 90% लोगों को रजिस्ट्री के लिए एप्वाइंटमेंट देने पर विचार चल रहा है। लेकिन इस बीच सोशल डिस्टेंस का पालन करना जरूरी होगा। 

हर साल 3600 करोड़ का मिलता है राजस्व
हर साल 6 लाख रजिस्ट्रियां होती है। जिससे सरकार को लगभग 3 हजार 600 रुपये का राजस्व मिलता है। हर महीने सूबे में लगभग 50 हजार रजिस्ट्रियां होती है। जिससे हर महीने सूबे को 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। यानि सूबे में हर रोज लगभग 1612 रजिस्ट्रियां होती है। लेकिन अब इसकी आधी भी नहीं हो रही है। जिससे सूबे को हर महीने 150 करोड रुपये का भी राजस्व नहीं मिल रहा है। 

बिल्डिरों से भी रजिस्ट्री बढ़ाने को लेकर होगी बात
सूबे में रजिस्ट्री बढ़ाने को बिल्डरों और कालोनाइजरों से भी मीटिंग की जाएगी। उन्हें अपने पूरे हो चुके प्रोजेक्टों को बेचने के लिए जोर लगाने के लिए कहा जाएगा। विभाग के अधिकारी भी यह बात जानते है कि जब इन बिल्डरों और कालोनाइजरों द्वारा प्लाट या फ्लैट बेचे जाएंगे,तभी लोग अपने प्लाट या फ्लैट की रजिस्ट्री करवाने के लिए तहसील तक पहुंचेंगे। इसी के लिए विभाग ने इनसे बात करने का फैसला किया है। ताकि जल्द ही यह अपने पूरे हो चुके प्रोजेक्ट को बेचने के लिए लोगों को स्पेशल आफर भी दे। जिससे रियल इस्टेट के धंधे में बूम लाया जा सकें।

Source BHASKAR

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